इजरायल के न्यूक्लियर सिटी डिमोना पर ईरान का बड़ा मिसाइल हमला, दर्जनों घायल, बढ़ा खतरा

ईरान और इजरायल के बीच चल रहा तनाव अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। शनिवार देर रात इजरायल के सबसे संवेदनशील इलाके डिमोना के पास हुए मिसाइल हमलों ने पूरे इलाके में डर और चिंता बढ़ा दी है। न्यूक्लियर सेंटर के करीब हुवे इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं और हालात लगातार बिगड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में अब सवाल ऊठ रहे हैं कि क्या ये जंग और खतरनाक मोड़ लेने वाली है?
न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के पास हमला
बता दें कि ईरान ने शनिवार देर रात इजरायल के दक्षिणी हिस्से में मिसाइल हमले (Iran attack on Dimona) किए। ये हमले खास तौर पर डिमोना (Dimona) और अराद शहरों में हुए, जो देश के मुख्य न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के काफी करीब हैं। मौजूदा संघर्ष में यह पहली बार है जब न्यूक्लियर सेंटर के आसपास सीधे हमला हुआ है।
इस हमले में कम से कम 7 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि कुल 60 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अराद शहर में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और एक बड़ा गड्ढा भी बन गया है, जिससे हमले की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की न्यूक्लियर एजेंसी ने साफ किया है कि फिलहाल किसी तरह का रेडिएशन लीक नहीं हुआ है और रिसर्च सेंटर सुरक्षित है। इसके बावजूद इलाके में डर का माहौल बना हुआ है।
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इजरायल की प्रतिक्रिया और बढ़ती सैन्य तैयारी
हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “बहुत कठिन रात” बताया और कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत और सुरक्षा के इंतजाम कर रही है। इजरायली सेना (IDF) के प्रमुख ने भी साफ संकेत दिए हैं कि यह संघर्ष जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा।
#WATCH सेंट्रल इज़राइल की ओर दागी गई एक ईरानी मिसाइल, जिसमें क्लस्टर वॉरहेड था, उसने आज एक किंडरगार्टन समेत कम से कम 10 जगहों पर हमला किया। वीडियो रिशोन लेज़ियन से है।
(वीडियो सोर्स: रॉयटर्स) pic.twitter.com/2m8I4TXfmt
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 21, 2026
गौरतलब है कि इस बार हमले के दौरान इजरायल की मिसाइल डिफेंस सिस्टम कोई भी मिसाइल रोक नहीं पाई, जिससे सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यही वजह है कि अब इजरायल अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत करने में जुट गया है।
ईरान की बढ़ती ताकत और अंतरराष्ट्रीय असर
हालांकि यह हमला सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहा। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य बेस डिएगो गार्सिया को भी निशाना बनाया। यह जगह करीब 2500 मील दूर है, जिससे साफ है कि ईरान की मिसाइल क्षमता पहले से कहीं ज्यादा लंबी दूरी तक पहुंचने लगी है।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ईरान ने अपने स्पेस प्रोग्राम की तकनीक का इस्तेमाल कर इस तरह के हमले किए हो सकते हैं। इससे दुनिया भर में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं।
इस पूरे संघर्ष का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। खासकर तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उधर, अमेरिका ने भी मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और अतिरिक्त सैनिक और जहाज तैनात किए हैं।
इस जंग का असर आम लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक ईरान में 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल में भी कई लोगों की जान गई है और दर्जनों घायल हुए हैं। लेबनान में भी हालात खराब हैं, जहां इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
हालांकि, कई देश अब हालात को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात समेत 20 से ज्यादा देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मदद की पेशकश की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच इंटरनेट प्रतिबंधों के कारण ईरान के अंदर की सटीक जानकारी सामने नहीं आ पा रही है, जिससे स्थिति और भी अनिश्चित बनी हुई है।


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