भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, एक घंटे में निवेशकों के 13 लाख करोड़ खाक

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, एक घंटे में निवेशकों के 13 लाख करोड़ खाक

सोमवार की सुबह निवेशकों के लिए बड़ा झटका लेकर आई। भारतीय शेयर बाजार में ऐसी गिरावट आई कि कुछ ही घंटों में करीब 13 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। जहां सेंसेक्स 1,800 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी अपने अहम स्तर के नीचे फिसल गया। हालांकि, सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जिसने बाजार को हिला दिया? क्या इसके पीछे ईरान युद्ध, महंगा तेल और गिरता रुपया जिम्मेदार हैं?

आज की बाजार स्थिति और प्रमुख नुकसान

सोमवार सुबह 11:10 बजे सेंसेक्स 72,713 पर कारोबार कर रहा था, जो 1,819 अंक गिरावट दर्शाता है। वहीं निफ्टी 22,561 पर था। बाजार में व्यापक कमजोरी रही, जिसमें सभी 30 सेंसेक्स स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए। टाटा स्टील, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, टाइटन और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों ने 2-3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की।

एनएसई पर सेक्टोरल इंडेक्स भी नकारात्मक भावना को दिखाते हैं। निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जो 3 प्रतिशत से अधिक टूटे। कुल मिलाकर 2,300 से अधिक शेयर गिरावट में (Stock Market Crash 23 March 2026) थे, जबकि केवल 250 शेयर बढ़त में रहे।

बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

भूराजनीतिक तनाव: ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ता संघर्ष बाजार को अस्थिर कर रहा है। हॉर्मुज जलसंधि के आसपास नई धमकियों ने वैश्विक जोखिम को बढ़ाया।

तेल की बढ़ती कीमतें: ब्रेंट क्रूड की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई। मध्य पूर्व में आपूर्ति संबंधी चिंताओं और हॉर्मुज जलसंधि के माध्यम से वैश्विक तेल परिवहन पर दबाव ने कीमतें बढ़ाई, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर असर पड़ा।

रुपये का रिकॉर्ड कम स्तर: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93.84 तक गिर गया। तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी फंड के बाहर निकलने से मुद्रा कमजोर हुई।

वैश्विक संकेत और संस्थागत बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाला। साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने से शेयरों की आकर्षण कम हो गई। एशियाई बाजारों में भी दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई गिरावट में रहे।

उच्च लागत और स्थानीय दबाव: सरकारी तेल कंपनियों ने औद्योगिक डीज़ल की कीमतों में 25 प्रतिशत या लगभग 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इससे लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में अनिश्चितता बनी रहेगी। वीके विजयकुमार (Geojit Investments) ने कहा कि वैश्विक संघर्ष ने सभी परिसंपत्ति वर्गों में जोखिम बढ़ा दिया है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि इस समय पैनिक न करें।

गौरतलब है कि रुपये की गिरावट से निर्यातक जैसे फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपनियों को लाभ हो सकता है। IT सेक्टर की हालात खराब दिख रही हैं, लेकिन आने वाले समय में इसमें सुधार की संभावना भी है।

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