तेल संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ईरान से 6 लाख बैरल कच्चा तेल आ रहा है भारत

तेल संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ईरान से 6 लाख बैरल कच्चा तेल आ रहा है भारत

भारत में पेट्रोल-डीजल को लेकर बढ़ती चिंता के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 5 साल के लंबे इंतजार के बाद ईरान से कच्चे तेल की सप्लाई फिर शुरू हो रही है। 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर एक बड़ा जहाज भारत की ओर बढ़ चुका है, जो जल्द ही गुजरात पहुंचेगा। हालांकि, इस सप्लाई के पीछे अंतरराष्ट्रीय तनाव भी जुड़ा है, जिससे बाजार पर इसका असर और भी अहम हो जाता है।

भारत को 6 लाख बैरल क्रूड ऑयल की सप्लाई

बता दें कि भारत को इस हफ्ते ईरान से 6,00,000 बैरल कच्चा तेल (India Iran oil shipment April 2026) मिलने जा रहा है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार,

‘पिंग शुन’ नाम का जहाज ईरान के खार्ग द्वीप से तेल लेकर गुजरात के वडिनार पोर्ट के लिए रवाना हो चुका है। यह जहाज करीब एक महीने की यात्रा के बाद 4 अप्रैल तक भारत पहुंच सकता है।

जानकारी के मुताबिक, इस तेल की खेप को अमेरिका द्वारा 30 दिन की विशेष छूट मिलने के बाद भारत तक पहुंचाया जा रहा है। यह डिलीवरी ऐसे समय में हो रही है जब भारत की रिफाइनरियों को स्टॉक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि यह तेल किस रिफाइनरी को मिलेगा।

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2019 के बाद पहली बार ईरान से तेल

मई 2019 के बाद यह पहली बार है जब भारत को ईरान से कच्चा तेल मिल रहा है। उस समय अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण भारत-ईरान तेल व्यापार लगभग रुक गया था। Kpler के विशेषज्ञ सुमित रिटोलिया के अनुसार,

क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बाद यह व्यापार फिर से शुरू हुआ है। खार्ग द्वीप, जो ईरान के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर है, वहां से देश के करीब 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। ऐसे में वहां से भारत के लिए तेल आना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव और आगे की स्थिति

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव भी बड़ा कारण है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि,

अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों में अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। इस संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है।

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब यह युद्ध अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ता है।

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