भारत ने चीन के हाथ से छीन लिया रूसी तेल, बीच समंदर में बदला टैंकर का रास्ता!

Russian Oil Diverted India from China
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भारत ने रूस से तेल खरीद में अचानक तेजी दिखाई है और इसका असर अब समुद्र में भी दिखने लगा है। बता दें कि जो टैंकर पहले चीन जा रहे थे, वे अब रास्ता बदलकर भारत की ओर मुड़ रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ शिपिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक तेल बाजार का पूरा संतुलन बदल सकता है। आखिर क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव और भारत को इससे क्या फायदा होगा, जानिए पूरी कहानी।

भारत ने क्यों बढ़ाई रूस से तेल खरीद?

बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध के कारण भारत की पारंपरिक कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। हालात को संभालने के लिए भारत ने रूस की ओर रुख किया और वहां से तेल आयात बढ़ाने का फैसला लिया। गौरतलब है कि अमेरिका से कुछ समय के लिए मिली छूट के बाद भारत ने बिना देर किए तेजी से खरीद शुरू कर दी।

इसी दौरान देश की तेल शोधन कंपनियों ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया, वह भी सिर्फ एक हफ्ते के अंदर। इससे साफ है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और हर हाल में सप्लाई मजबूत रखना चाहता है।

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समुद्र में ही बदला टैंकर का रास्ता

समुद्र में चल रहे तेल के जहाजों के रास्ते अचानक बदलते दिख रहे हैं, जो अपने आप में बड़ी खबर है। “एक्वा टाइटन” नाम का एक विशाल तेल टैंकर, जो पहले चीन के रिजाओ बंदरगाह की तरफ जा रहा था, उसने दक्षिण चीन सागर में ही अपना रुख बदल लिया (Russian Oil Diverted India)। अब यह तेल टैंकर भारत के न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर तेजी से बढ़ रहा है और 21 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है।

बता दें कि यह जहाज रूस के बाल्टिक सागर से जनवरी के आखिर में “यूराल्स” कच्चा तेल लेकर निकला था। हालांकि, यह कोई अकेली घटना नहीं है, क्योंकि जानकारी के मुताबिक कम से कम सात ऐसे तेल टैंकर हैं जो रास्ते में ही चीन से मुड़कर भारत की ओर आ गए हैं। इससे साफ समझा जा सकता है कि इस समय भारत में तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है और इसका असर सीधे वैश्विक बाजार पर भी पड़ रहा है।

वैश्विक बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

बता दें कि कुछ समय पहले जब भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद घटा दी थी, तब चीन सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, हालांकि अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी दोबारा रूस से तेल लेने की तैयारी में हैं, जिससे बाजार में मांग बढ़ने लगी है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है।

ऐसे हालात में आने वाले दिनों में कच्चा तेल महंगा हो सकता है। गौरतलब है कि “ज़ोज़ू एन. (Zouzou N.)” नाम का एक टैंकर, जो रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह से निकलकर पहले चीन जा रहा था, अब रास्ता बदलकर भारत के सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज कजाखस्तान का सीपीसी ब्लेंड कच्चा तेल लेकर आ रहा है और 25 मार्च तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।

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भारत के लिए क्या मायने?

भारत के लिए यह बदलाव काफी अहम है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ते और स्थिर विकल्प तलाश रहा है। रूस से मिलने वाला तेल आमतौर पर रियायती दर पर मिलता है, जिससे भारत को आर्थिक फायदा होता है। हालांकि, यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, यह पूरी तरह वैश्विक राजनीति और युद्ध के हालात पर निर्भर करेगा। अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो भारत की रूस पर निर्भरता और बढ़ सकती है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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