सोने के बाद चांदी से भी पैसा निकालने लगे निवेशक, 13 महीने बाद गोल्ड ETF में करोड़ों की बिकवाली, जानिए वजह

Gold ETF Outflow 2026: 13 महीने बाद निकले करोड़ों रुपये, चांदी में भी बढ़ी बिकवाली
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Gold ETF Outflow 2026: सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार आंकड़ों ने बाजार को चौंका दिया है। 13 महीने तक लगातार निवेश आकर्षित करने वाले Gold ETF से अचानक सैकड़ों करोड़ रुपये निकल गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिला है जब सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

आखिर निवेशक सोने से दूरी क्यों बना रहे हैं? क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली है या बाजार में किसी बड़े बदलाव का संकेत? आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की वजह और इसके मायने।

Gold ETF में क्यों दिखी बड़ी निकासी?

मई 2026 के दौरान Gold ETF से करीब 725 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। यह पिछले 13 महीनों में पहली बार है जब इस श्रेणी में शुद्ध आउटफ्लो देखने को मिला। इससे पहले लगातार निवेशकों का पैसा गोल्ड ETF में आ रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली रही। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। कई निवेशकों ने ऊंचे भाव पर अपने निवेश से लाभ बुक करना बेहतर समझा। इसके अलावा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित किया।

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सोने और चांदी की कीमतों का असर भी पड़ा

हाल के महीनों में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जियो-पॉलिटिकल तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण पहले इन धातुओं में तेजी आई, लेकिन बाद में कीमतों में नरमी आने लगी।

कीमतों में इस बदलाव के बाद कई निवेशकों ने जोखिम कम करने और मुनाफा सुरक्षित करने के लिए अपने ETF निवेश बेचना शुरू कर दिया। इसी कारण गोल्ड और सिल्वर ETF दोनों पर दबाव देखने को मिला।

विशेषज्ञों का कहना है कि,

जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो निवेशक एक समय बाद मुनाफा निकालने लगते हैं। फिलहाल सोने और चांदी के ETF में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

आगे निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?

हालांकि हालिया निकासी को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है। वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि सोना अब भी पोर्टफोलियो में जोखिम संतुलन का एक महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार,

वर्तमान समय में निवेशक अपने पोर्टफोलियो का पुनर्गठन कर रहे हैं। कुछ लोग सोने में मुनाफा बुक कर अन्य निवेश विकल्पों की ओर जा रहे हैं, जबकि कुछ निवेशक नई कीमतों पर दोबारा अवसर तलाश रहे हैं।

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आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाएं यह तय करेंगी कि सोना और चांदी फिर से निवेशकों को कितना आकर्षित कर पाते हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि Gold ETF में 13 महीने बाद आई निकासी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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