NEET विवाद के बाद मोदी सरकार का बड़ा फैसला, पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना!

Anti Paper Leak Bill 2026: देशभर में भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार अब कानून को और सख्त बनाने जा रही है। सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में एक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रस्ताव रखा गया है।
पेपर लीक पर सख्त होगी कार्रवाई
केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित संशोधन (Anti Paper Leak Bill 2026) के तहत प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करने और सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी करने वालों के लिए अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
मौजूदा 2024 के कानून में ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन के जरिए इन सजा और जुर्माने को काफी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा।
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सेवा प्रदाताओं और संगठित गिरोहों पर भी होगी बड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों या सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी भी पहले से अधिक तय की गई है। यदि किसी सेवा प्रदाता संस्था की भूमिका पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी में सामने आती है, तो उस पर अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
इसके अलावा परीक्षा आयोजन की पूरी लागत भी संबंधित संस्था से वसूली जा सकती है। ऐसी एजेंसियों को आठ वर्षों तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से बाहर रखा जा सकता है। पहले यह अवधि चार वर्ष और जुर्माना एक करोड़ रुपये तक था।
यदि जांच में यह साबित होता है कि सेवा प्रदाता संस्था के वरिष्ठ अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति अपराध में शामिल थे या उनकी सहमति से यह हुआ, तो उन्हें 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ भी सख्त प्रावधान जोड़े हैं। ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अतिरिक्त कारावास भी दिया जा सकेगा।
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जांच दो महीने में पूरी करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव
संशोधन विधेयक में जांच और सुनवाई को तेज करने के लिए भी नए प्रावधान जोड़े गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार, पुलिस अधिकारी या केंद्रीय जांच एजेंसी को मामला दर्ज होने या सौंपे जाने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। यदि केंद्र सरकार किसी विशेष कार्यबल (Special Task Force) को जांच की जिम्मेदारी देती है, तो उसे भी अधिसूचना जारी होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से परामर्श कर विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षा से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई होगी ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। यह संशोधन ऐसे समय लाया जा रहा है जब NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाने की मांग लगातार उठ रही थी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता बनाए रखना, समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।




