NSE IPO को लेकर अचानक बदली तस्वीर, ₹1,785 से सीधे ₹1,700 हुवा प्राइस बैंड

₹1,785 से ₹1,700 हुआ NSE IPO Price Band
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NSE IPO को लेकर बाजार में हलचल तेज हो गई है। IPO के प्राइस बैंड को लेकर पहले ₹1,785 की चर्चा थी, लेकिन अब इसके घटकर ₹1,700 तक आने की खबर सामने आई है। इसका असर SBI, Bank of Baroda, GIC Re और New India Assurance जैसी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री पर भी पड़ सकता है। ऐसे में IPO से जुड़ा पूरा नया गणित समझने के लिए यह खबर पढ़ें।

क्यों घटा NSE IPO का प्राइस बैंड?

Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, NSE ने अपने आगामी IPO के संभावित प्राइस बैंड (NSE IPO Price Band) को ₹1,785 से घटाकर ₹1,700 प्रति शेयर कर दिया है। प्राइस में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब NSE के कुछ मौजूदा शेयरधारक IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं।

कीमत कम होने का मतलब है कि हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों को पहले के अनुमान की तुलना में कम रकम मिल सकती है। इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक, NSE IPO में करीब 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी। यह NSE की कुल इक्विटी का लगभग 6 फीसदी हिस्सा बनता है।

यह इश्यू पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS होने की उम्मीद है। OFS में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। नई रिपोर्ट में IPO का आकार भी कम होने की संभावना जताई गई है। NSE में करीब 5.5 फीसदी हिस्सेदारी ही IPO के जरिए पेश की जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ शेयरधारकों ने कम प्राइस बैंड पर अपनी हिस्सेदारी बेचने से पीछे हटने का फैसला किया है। इसी वजह से प्रस्तावित डील का आकार पहले के मुकाबले छोटा हो सकता है।

IPO में कौन सी कंपनियां बेचेंगी हिस्सेदारी?

NSE IPO में अपनी हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों में SBI, Bank of Baroda, GIC Re और New India Assurance जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। यही वजह है कि NSE के IPO से जुड़ी खबरों के बीच इन कंपनियों के शेयर भी निवेशकों की नजर में आ गए हैं।

SBI (State Bank of India) NSE IPO के दौरान करीब 2.48 करोड़ शेयर बेच सकता है। वहीं Bank of Baroda की ओर से लगभग 1.10 करोड़ NSE शेयरों की बिक्री की उम्मीद है। GIC Re भी इस IPO में करीब 1.07 करोड़ शेयर बेचने की योजना रखता है।

New India Assurance भी NSE के उन मौजूदा शेयरधारकों में शामिल है, जो IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। इन कंपनियों के लिए NSE IPO की कीमत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राइस बैंड कम होने पर हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाली रकम पर भी असर पड़ सकता है।

इसके अलावा IFCI का NSE में सीधा नहीं, बल्कि Stock Holding Corporation of India के जरिए अप्रत्यक्ष एक्सपोजर है। दूसरी ओर, NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक LIC के अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की उम्मीद है।

NSE की वैल्यूएशन भी घटने की संभावना

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर NSE IPO में करीब 5.5 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री होती है तो इससे लगभग ₹24,300 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। इस आधार पर NSE का मूल्यांकन अधिकतम करीब ₹4.42 लाख करोड़ तक हो सकता है। यह पहले तय किए गए अधिकतम करीब ₹5.26 लाख करोड़ के संभावित मूल्यांकन से काफी कम है। यानी प्राइस बैंड और IPO के आकार में बदलाव NSE की संभावित वैल्यूएशन पर भी असर डाल सकता है।

IPO के आकार में यह संभावित कमी ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय प्राइमरी मार्केट में एक साथ कई बड़े इश्यू आने को लेकर चिंता बढ़ रही है। बाजार की क्षमता पर दबाव तब और बढ़ सकता है जब Jio Platforms भी अपने संभावित IPO की दिशा में आगे बढ़ता है। उसका IPO भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है।

इस पूरी स्थिति में NSE IPO को लेकर निवेशकों की नजर अब प्राइस बैंड, ऑफर की जाने वाली हिस्सेदारी और NSE की संभावित वैल्यूएशन पर बनी हुई है। साथ ही SBI, Bank of Baroda, GIC Re और New India Assurance जैसे NSE के शेयर बेचने वाले सूचीबद्ध शेयरधारकों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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