SIR विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा कदम, अब नए डिजिटल अभियान से जीतना चाहता है लोगों का भरोसा

ECINET: SIR विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा डिजिटल अभियान, ऐसे जीतेगा लोगों का भरोसा
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विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद के बाद चुनाव आयोग अब अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और लोगों के लिए आसान बनाने की दिशा में नए कदम उठा रहा है। आयोग ने डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने के साथ-साथ युवाओं में मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए भी नई पहल शुरू की है।

इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने अपना पहला राष्ट्रव्यापी मीडिया सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 350 से अधिक पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने की भी घोषणा की गई है।

SIR क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों हुआ?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की जांच और सत्यापन किया जाता है ताकि रिकॉर्ड सही और अद्यतन बना रहे। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जा सकते हैं, गलत जानकारी में सुधार किया जा सकता है और नियमों के अनुसार अपात्र प्रविष्टियों को हटाया भी जा सकता है।

हाल के महीनों में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला। कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं। इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे और इस मुद्दे पर व्यापक बहस हुई। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।

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आयोग का कहना है कि,

मतदाता सूची में हर बदलाव तय कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटता है, तो उसे अपील करने और अपना नाम दोबारा शामिल कराने का वैधानिक अधिकार भी प्राप्त है।

इसी बीच आयोग अब डिजिटल सेवाओं, मतदाता जागरूकता अभियान और मीडिया के साथ बेहतर संवाद के जरिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने तथा जनता का भरोसा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

चुनाव आयोग युवाओं पर इतना जोर क्यों दे रहा है?

चुनाव आयोग का मानना है कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती में युवाओं की अहम भूमिका होती है। इसी सोच के तहत आयोग ने स्कूलों और कॉलेजों में मतदाता जागरूकता क्लबों को फिर से सक्रिय करने का फैसला लिया है, ताकि युवाओं को कम उम्र से ही मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सही जानकारी मिल सके।

इन क्लबों के जरिए छात्रों को चुनावी प्रक्रिया, संविधान के मूल्यों और जिम्मेदार नागरिक बनने के महत्व से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए क्विज प्रतियोगिताएं, मॉक चुनाव, वाद-विवाद, मतदाता पंजीकरण अभियान और नागरिक शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्र व्यवहारिक रूप से भी चुनावी व्यवस्था को समझ सकें।

चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि,

युवाओं की चुनावी भागीदारी अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है। यही कारण है कि आयोग पहली बार वोट देने से पहले ही छात्रों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना चाहता है।

आयोग का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में अधिक जागरूक, जिम्मेदार और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने वाले मतदाता तैयार होंगे।

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ECINET क्या है और यह कैसे काम करेगा?

ECINET चुनाव आयोग का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे चुनाव से जुड़ी कई सेवाओं को एक ही जगह उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल दोनों के जरिए काम करेगा, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता नया पंजीकरण करा सकेंगे, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, सुधार कराने या हटाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा लोग अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे, मतदाता सूची में अपना नाम जांच सकेंगे, डिजिटल वोटर आईडी (e-EPIC) डाउनलोड कर सकेंगे और चुनाव संबंधी शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

ECINET से मतदाताओं को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

ECINET के जरिए मतदाताओं को चुनाव आयोग की कई सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी। इस पोर्टल के माध्यम से वे बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) और अन्य चुनाव अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर BLO के साथ ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक किया जा सकेगा।

इसके अलावा दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, ताकि वे बिना किसी परेशानी के चुनाव संबंधी सेवाओं का लाभ उठा सकें। चुनाव आयोग के अनुसार,

ECINET का पायलट चरण सकारात्मक रहा है। अब तक 101 मिलियन से अधिक पंजीकरण फॉर्म इस प्लेटफॉर्म पर संसाधित किए जा चुके हैं और हर दिन औसतन करीब 2.7 लाख फॉर्म पर काम किया जा रहा है। लगभग 10 लाख बूथ स्तर के अधिकारी इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं, जबकि SIR अभियान के दौरान तैयार हुए 1.5 बिलियन से अधिक दस्तावेजों का भी डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

आयोग का कहना है कि,

ECINET को देश के 1.1 मिलियन मतदान केंद्रों, 543 लोकसभा क्षेत्रों और 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में एक अरब से अधिक मतदाताओं को सेवाएं देने के लिए तैयार किया गया है। भविष्य में यह प्लेटफॉर्म अंग्रेजी के अलावा 22 अनुसूचित भाषाओं में भी उपलब्ध होगा।

चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनावी सेवाएं अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए पहले से कहीं अधिक आसान बनेंगी।

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