IPL का दबाव या ज्यादा क्रिकेट? टीम इंडिया की बढ़ती चोटों पर BCCI में मचा घमासान

Team India Injury Crisis: भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों ने अब एक गंभीर बहस छेड़ दी है। BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े एक सूत्र ने IPL के दौरान फ्रेंचाइजी और आर्थिक दबाव के कारण खिलाड़ियों के चोट के बावजूद खेलने का दावा किया है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि कई प्रमुख भारतीय खिलाड़ी इस समय चोट के कारण टीम से बाहर हैं और BCCI बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उनकी फिटनेस और रिहैबिलिटेशन व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है।
IPL और चोटों के बीच क्या है कनेक्शन?
ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के एक सूत्र ने भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते चोट के मामलों के पीछे लगातार बढ़ते क्रिकेट शेड्यूल के साथ-साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के दबाव को भी जिम्मेदार बताया है। सूत्र का दावा है कि कुछ खिलाड़ी IPL के दौरान चोट लगने के बावजूद खेलते रहते हैं।
इसके पीछे फ्रेंचाइजी और आर्थिक दबाव को एक कारण बताया गया है। IPL के बाद ऐसे खिलाड़ी इलाज और रिहैबिलिटेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचते हैं। सूत्र ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों के शरीर की अपनी एक सीमा होती है। लगातार क्रिकेट खेलने से ओवरयूज और तनाव से होने वाली चोटों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उम्रदराज खिलाड़ियों में ऐसी चोटों से वापसी का समय पहले से तय करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, सूत्र ने फ्रेंचाइजी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस दोनों के मेडिकल स्टाफ का बचाव भी किया। उनके मुताबिक मेडिकल टीमें सक्षम और जिम्मेदार हैं और खिलाड़ियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में चयनकर्ताओं, कोच और कप्तान के लिए खिलाड़ियों को लेकर सही फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।
कई बड़े खिलाड़ी चोट के कारण टीम से बाहर
भारत इस समय अलग-अलग फॉर्मेट में चोटों की बड़ी समस्या से जूझ रहा है। जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए शुरुआती टीम में फिटनेस के आधार पर शामिल किया गया था, लेकिन बाद में दोनों को बाहर कर दिया गया।
बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ भारत के वनडे दौरे के दौरान लगी घुटने की चोट से परेशान हैं। वहीं साई सुदर्शन को श्रीलंका में भारत A की रेड-बॉल सीरीज के दौरान पैर में चोट लगी थी। इसके अलावा हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण उपलब्ध नहीं हैं। वॉशिंगटन सुंदर क्वाड्रिसेप्स की चोट से उबर रहे हैं।
टेस्ट टीम के खिलाड़ियों में आकाश दीप सबसे लंबे समय से मैदान से बाहर हैं। वह बंगाल की रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में हार के बाद से लोअर-बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर से उबर रहे हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इस समय सफेद गेंद के कई खिलाड़ियों की भी देखरेख हो रही है। इनमें हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और प्रिंस यादव शामिल हैं।
VVS लक्ष्मण ने कहा, दोषी तलाशना सही तरीका नहीं
चोटों को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने सप्ताहांत में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया और इसके प्रमुख VVS लक्ष्मण के साथ स्थिति की समीक्षा की। रविवार को सैकिया और BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में लक्ष्मण ने कहा कि,
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी सिर्फ चोटिल खिलाड़ियों के इलाज तक सीमित नहीं है। BCCI ने इस संस्थान को इससे कहीं बड़ी भूमिका दी है।
लक्ष्मण ने चोटों के मामले में किसी एक व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराने से भी बचने की बात कही। उनके मुताबिक खिलाड़ियों के करियर में चोट लगना सामान्य बात है और इसी वजह से खिलाड़ियों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। इस पूरी चर्चा के बीच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में Head of Sports Science and Medicine का पद भी खाली है।
यह पद नितिन पटेल के 2025 की शुरुआत में जाने के बाद से नहीं भरा गया है। लक्ष्मण के अनुसार सही उम्मीदवार तलाशना आसान नहीं रहा, क्योंकि इस पद के लिए काफी अनुभव के साथ भारतीय क्रिकेटरों और उनकी जरूरतों की समझ भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि,
एंड्रयू लीपस को नियुक्त करने पर सहमति बनी थी, लेकिन पारिवारिक कारणों से उन्होंने बाद में पीछे हटने का फैसला किया।
ऐसे में भारतीय क्रिकेट में बढ़ती चोटों की तस्वीर किसी एक विभाग की गलती से ज्यादा जटिल नजर आ रही है। खिलाड़ियों का लगातार व्यस्त शेड्यूल, IPL का दबाव, चोटों की निगरानी, मेडिकल व्यवस्था और रिहैबिलिटेशन, इन सभी पहलुओं पर अब BCCI को ध्यान देना होगा।

