7 सितंबर को रखा जाएगा जया एकादशी का व्रत, जानिए भगवान विष्णु की प्रिय इस एकादशी की खास मान्यताएं और लाभ

Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत से पापों से मुक्ति, मोक्ष और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस साल जया एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।
पाप और दोष दूर करने वाला माना जाता है जया एकादशी व्रत
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी या अजा एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से व्यक्ति को अपने जीवन में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कई बार इंसान से जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिनका उसे पता भी नहीं चलता। जया एकादशी का व्रत ऐसे अनजाने पापों के प्रभाव को दूर करने वाला माना गया है। पौराणिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को पिशाच या नीच योनि के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।
इसी वजह से भगवान विष्णु के भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ के साथ श्री हरि का ध्यान करते हैं।
मोक्ष और भगवान विष्णु की कृपा से जुड़ी है मान्यता
जया एकादशी को भगवान विष्णु की प्रिय एकादशियों में माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से व्रत करता है और भगवान श्री हरि की पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद उत्तम लोक की प्राप्ति हो सकती है। मान्यता के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने वाले साधक को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
इससे उसे वैकुण्ठ लोक में स्थान मिलने और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। हालांकि, ये बातें धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित हैं। भक्तों के लिए इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा और आत्मसंयम माना जाता है।
सुख-समृद्धि के साथ मन की शांति के लिए भी खास
जया एकादशी के व्रत को केवल पापों से मुक्ति और मोक्ष से ही नहीं जोड़ा जाता, बल्कि सुख-समृद्धि से भी इसका संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा मिलने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आर्थिक परेशानियां दूर होने और घर में धन-धान्य बढ़ने की भी मान्यता है।
इस व्रत का एक दूसरा पहलू मानसिक शांति से जुड़ा है। उपवास के दौरान व्यक्ति अपना अधिक समय पूजा, ध्यान और भगवान के स्मरण में लगाता है। इससे मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों को कम करने में मदद मिल सकती है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि इससे क्रोध और तनाव कम होता है तथा जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
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एकादशी के उपवास को स्वास्थ्य से जोड़कर भी देखा जाता है। आयुर्वेदिक और पारंपरिक दृष्टिकोण में समय-समय पर उपवास को पाचन तंत्र को आराम देने वाला माना गया है। हालांकि शरीर से विषैले तत्व निकलने या किसी बीमारी का इलाज होने जैसे दावों को वैज्ञानिक रूप से सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। व्रत रखने वालों को अपनी सेहत और खान-पान का ध्यान रखना चाहिए।
7 सितंबर 2026 को जया एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं के लिए भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मसंयम का अवसर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पापों से मुक्ति, मोक्ष, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

