RBI के फैसले के बाद Tata Sons की लिस्टिंग तय, 100 साल बाद शेयर बाजार में एंट्री लेगा टाटा साम्राज्य?
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। RBI ने कंपनी की वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उसने लिस्टिंग षसे बचने के लिए NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी। अब कंपनी का पब्लिक लिस्ट होना लगभग तय माना जा रहा है।
मुंबई से आ रही खबर के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सितंबर 2026 को लिखे एक लेटर में Tata Sons की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। बता दें कि कंपनी ने मार्च 2024 में अपने आप को Core Investment Company के तौर पर deregister करने के लिए आवेदन किया था। अब इस फैसले के बाद देश के सबसे बड़े बिजनेस घराने की होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ेगा।
RBI ने क्यों ठुकराई Tata Sons की दलील
दरअसल कहानी 2022 में शुरू हुई थी। RBI ने तब Scale Based Regulation के तहत Tata Sons को Upper Layer NBFC में डाल दिया था। नियम के मुताबिक इस कैटेगरी की सभी कंपनियों को तीन साल के अंदर यानी सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। लिस्टिंग से बचने के लिए Tata Sons ने एक रास्ता निकाला। कंपनी ने कहा कि उसने 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुका दिया है और अब वह पब्लिक फंड का इस्तेमाल नहीं करती है इसलिए उसे NBFC की लिस्ट से हटा दिया जाए।
लेकिन RBI ने इस दलील को नहीं माना। RBI ने इस साल जून में नियमों को और सख्त कर दिया। नए नियम के मुताबिक अगर किसी कंपनी की संपत्ति 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है तो वह अपने आप Upper Layer में आएगी और साथ ही ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों से आने वाला पैसा भी indirect public fund माना जाएगा। Tata Sons की अकेली संपत्ति 31 मार्च 2026 तक 2.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है जो तय सीमा से दोगुनी है। यही वजह है कि RBI ने साफ कह दिया है कि Tata Sons को NBFC Upper Layer के सभी नियमों का पालन करना होगा जिसमें लिस्टिंग सबसे अहम है।
Tata Sons Listing से शेयर बाजार में क्या होगा बदलाव
अगर Tata Sons लिस्ट होती है तो यह भारत के शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। Tata Sons कोई छोटी कंपनी नहीं है। यह 100 साल से भी पुरानी होल्डिंग कंपनी है जो TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power, Indian Hotels और Air India जैसी दिग्गज कंपनियों को कंट्रोल करती है। अब तक यह कंपनी प्राइवेट थी और इस पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल था।
लिस्टिंग के बाद कंपनी को हर तिमाही अपने नतीजे बताने होंगे, कैपिटल कहां लगाया जा रहा है इसका हिसाब देना होगा और ज्यादा पारदर्शिता रखनी होगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि लिस्टिंग से कंपनी की वैल्यूएशन साफ होगी और आम निवेशकों को भी देश के सबसे भरोसेमंद समूह की होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश करने का मौका मिलेगा। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि टाटा समूह लंबे समय वाले फैसले अब इतनी आसानी से नहीं ले पाएगा क्योंकि बाजार हर कदम पर रिटर्न मांगेगा।
Shapoorji Pallonji Group को कैसे मिलेगा फायदा
इस पूरे फैसले का सबसे ज्यादा असर Tata Sons के दूसरे सबसे बड़े शेयरहोल्डर Shapoorji Pallonji Group पर पड़ेगा। टाटा ट्रस्ट्स के पास Tata Sons के करीब 66 प्रतिशत शेयर हैं जबकि Shapoorji Pallonji Group के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पिछले कई सालों से SP ग्रुप लगातार Tata Sons की लिस्टिंग की मांग कर रहा था।
दरअसल लिस्टेड न होने की वजह से SP ग्रुप अपनी हिस्सेदारी को बेच नहीं पा रहा था और उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। कर्ज के बोझ में फंसे SP ग्रुप के लिए Tata Sons में लगी यह हिस्सेदारी सबसे बड़ी संपत्ति है। अगर Tata Sons IPO लाती है तो SP ग्रुप की 18 प्रतिशत हिस्सेदारी की सही बाजार कीमत तय होगी। इससे वह अपनी हिस्सेदारी बेचकर या गिरवी रखकर अरबों रुपये जुटा सकता है। इसीलिए बाजार इसे Shapoorji Pallonji Group की बड़ी जीत के तौर पर देख रहा है। वहीं टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं था क्योंकि इससे ट्रस्ट के कंट्रोल और ग्रुप की प्राइवेट काम करने की संस्कृति पर असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर RBI के इस फैसले ने Tata Sons के सामने लिस्टिंग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं छोड़ा है। हालांकि अभी कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि Tata Sons लिस्टिंग के लिए क्या टाइमलाइन तय करती है।

