Jio का बड़ा प्लान, 650 किमी ऊपर भेजे जाएंगे 1,600 सैटेलाइट; Starlink से भी ऊंची होगी ऑर्बिट

Reliance Jio सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी अपने प्रस्तावित नेटवर्क के लिए 1,600 सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 650 किलोमीटर ऊपर Low Earth Orbit में तैनात करने की योजना बना रही है। Jio का चुना हुआ ऑर्बिट SpaceX के Starlink से थोड़ा ऊपर होगा।
ऐसे में Jio का सैटेलाइट नेटवर्क किस तरह काम करेगा और कंपनी ने 650 किलोमीटर की ऊंचाई को क्यों चुना है, यह इस पूरे प्लान का अहम हिस्सा है।
650 किमी की ऊंचाई पर क्यों भेजे जाएंगे Jio के सैटेलाइट?
Reliance Jio अपने सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क के लिए करीब 1,600 सैटेलाइट का कॉन्स्टेलेशन तैयार करने की योजना (Jio 1600 Satellites Plan) बना रहा है। इन सैटेलाइट्स को LEO (Low Earth Orbit) में लगभग 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा।
IN-SPACe के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, Jio का प्रस्तावित ऑर्बिट SpaceX के Starlink सैटेलाइट्स से थोड़ा ऊपर होगा। Starlink के सैटेलाइट करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर बताए गए हैं। वहीं Amazon Leo का कॉन्स्टेलेशन करीब 630 किलोमीटर की ऊंचाई पर है।
Jio के लिए 650 किलोमीटर का ऑर्बिट चुनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल होने वाला ऑर्बिटल बैंड हो सकता है। इससे ऑर्बिटल स्लॉट और स्पेक्ट्रम इंटरफेरेंस को लेकर समन्वय में मदद मिल सकती है। हालांकि, Jio के पूरे कॉन्स्टेलेशन की अंतिम योजना अभी सामने नहीं आई है।
IN-SPACe के एक अधिकारी ने बताया कि प्रोजेक्ट को तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन कॉन्स्टेलेशन का अंतिम प्लान अभी एजेंसी के पास नहीं आया है। इस प्रोजेक्ट का तकनीकी मूल्यांकन IN-SPACe, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO और दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने मिलकर किया है।
Starlink और Amazon Leo से कितनी अलग है Jio की योजना?
सैटेलाइट इंटरनेट के बाजार में Reliance Jio को पहले से मौजूद बड़ी कंपनियों से मुकाबला करना होगा। इनमें सबसे प्रमुख नाम Starlink का है। Starlink के पास करीब 11,000 सैटेलाइट बताए गए हैं और इसका नेटवर्क हाई-स्पीड तथा कम देरी वाले ग्लोबल ब्रॉडबैंड इंटरनेट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
Jio का प्रस्तावित 650 किलोमीटर का ऑर्बिट Starlink के करीब 550 किलोमीटर वाले ऑर्बिट से ऊपर होगा। Amazon Leo भी इस क्षेत्र में बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क तैयार कर रहा है। इसके शुरुआती कॉन्स्टेलेशन डिजाइन में 3,000 से ज्यादा सैटेलाइट शामिल हैं और इन्हें करीब 630 किलोमीटर की ऊंचाई पर रखा गया है।
वहीं, OneWeb के सैटेलाइट Jio के प्रस्तावित ऑर्बिट से काफी ज्यादा ऊंचाई पर हैं। OneWeb के सैटेलाइट लगभग 1,200 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है। ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद एक सैटेलाइट आम तौर पर ज्यादा बड़े इलाके को कवर कर सकता है।
इसी वजह से OneWeb के करीब 650 सैटेलाइट Jio के प्रस्तावित 1,600 सैटेलाइट के समान क्षेत्र में कवरेज देने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन कम ऊंचाई पर सैटेलाइट होने से सिग्नल को पृथ्वी तक पहुंचने में कम समय लग सकता है। ऐसे में Jio के 650 किलोमीटर वाले ऑर्बिट का एक फायदा कम सिग्नल देरी के रूप में सामने आ सकता है।
2027 में टेस्ट फ्लाइट, 2035 तक पूरा नेटवर्क बनाने का लक्ष्य
Reliance Jio अपने सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क को एक साथ तैयार करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। कंपनी का पहला टेस्ट फ्लाइट करीब 2027 में होने की योजना है। इसके बाद भारत में लगभग 2028 के आसपास सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
Jio की योजना के मुताबिक, 2030 तक करीब 450 से 500 सैटेलाइट ऑर्बिट में भेजे जा सकते हैं। इसके बाद कंपनी 2035 तक पूरा नेटवर्क कवरेज स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। हर सैटेलाइट से करीब 100 से 150 Gbps की क्षमता मिलने की उम्मीद है। पूरी 1,600 सैटेलाइट वाली प्रणाली की भारत में कुल क्षमता करीब 5 Tbps तक पहुंच सकती है।
650 किमी ऑर्बिट से Jio को क्या फायदा होगा?
LEO पृथ्वी के सबसे नजदीक वाला प्रमुख ऑर्बिटल क्षेत्र है। इसे सामान्य तौर पर पृथ्वी की सतह से करीब 160 से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच माना जाता है। ऐसे में Reliance Jio का 650 किलोमीटर वाला प्लान सिर्फ सैटेलाइट की संख्या की वजह से ही खास नहीं है।
कंपनी ने जिस ऑर्बिट को चुना है, वह Starlink और Amazon Leo की योजनाओं के मुकाबले इसे अलग स्थिति में रखता है। अब असली नजर इस बात पर होगी कि Jio अपने प्रस्तावित 1,600 सैटेलाइट नेटवर्क को तय समय के अनुसार कितनी तेजी से जमीन पर उतार पाता है।

