Lovlina Borgohain ने अपने जन्मदिन पर रचा इतिहास, गांव की पगडंडी से एशियन गेम्स गोल्ड तक का सफर

2 अक्टूबर 2026 का दिन भारत के साथ-साथ Lovlina Borgohain के लिए खास बन चुका है। लवलीना ने अपने जन्मदिन पर एशियन गेम्स के 75 किलोग्राम बॉक्सिंग फाइनल में गोल्ड जीत कर इतिहास रच दिया है। यह फाइनल मुकाबला लवलीना के लिए आसान नहीं था, लेकिन अपने धैर्य और काउंटर अटैक के जरिए उन्होंने यह कामयाबी हासिल की है। अपनी इस जीत से लवलीना एशियन गेम्स में फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बॉक्सर महिला बन चुकी है ।
आखिर कौन हैं Lovlina Borgohain ?
असम के गोलाघाट में 2 अक्टूबर 1997 को एक साधारण परिवार में जन्मी लवलीना का परिवार छोटे व्यवसाय से जुड़ा है। लवलीना को बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी रही, लेकिन उन्होंने शुरुआत बॉक्सिंग से नहीं बल्कि किक बॉक्सिंग से की। उनकी जुड़वा बहनें भी किकबॉक्सिंग करती थी। इसी दौरान लवलीना की मुलाकात कोच पदुम बोरो से हुई। इन्होंने ही लवलीना की छुपी हुई प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बॉक्सिंग की तरफ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 2012 से लवली रानी गंभीर ट्रेन लेनी शुरू की और आखिरकार उनकी यह मेहनत रंग लाई
संसाधनों की कमी लेकिन सपने थे बड़े
Lovlina Borgohain के शुरुआती दिन काफी कठिन रहे। वह एक ऐसे गांव में जन्मी थी जहां सुविधाओं की कमी थी। रोजाना ट्रेनिंग के लिए उन्हें कई किलोमीटर तक साइकलिंग कर जाना पड़ता था। शुरुआती दौर में लवलीना को पथरीली सड़कों पर भी साइकिल चलानी पड़ती थी, क्योंकि यहां सड़के भी कच्ची थी। उस दौर में लवलीना को सामाजिक ताने भी सुनने पड़ते थे। आस पड़ोस के लोग लवलीना के परिवार वालों को भी कई बार बेइज्जत कर देते थे। लेकिन लवलीना के माता-पिता ने कभी भी इसका असर अपनी बेटियों पर नहीं पड़ने दिया बल्कि इन सब की वजह से ही लवलीना का प्रदर्शन दिन-ब-दिन बेहतर होता गया।
मां की किडनी ट्रांसप्लांट में भी ट्रेनिंग रही जारी
लवलीना एक ऐसी समर्पित खिलाड़ी हैं कि उन्होंने अपने माँ की सर्जरी के दौरान भी टोक्यो ओलंपिक की तैयारी नहीं छोड़ी। कोरोना संक्रमण के दौरान भी उन्होंने अपनी तैयारी में व्यवधान नहीं पड़ने दिया बल्कि फिटनेस बनाए रखने के लिए घर पर ही भरपूर अभ्यास किया। इसी वजह से लवलीना टोक्यो ओलंपिक तक पहुंची। अपने इसी समर्पित प्रयास की वजह से लवलीना ने 2021 में आयोजित टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता और ओलंपिक जीतने वाली तीसरी भारतीय बॉक्सर बानी।
लवलीना के लिए एशियन गेम्स मेडल क्यों है खास?
- Lovlina Borgohain की वजह से ही 12 साल बाद कोई भारतीय महिला बॉक्सिंग में एशियन गेम्स गोल्ड जीत पाई है।
- लवलीना ने खेल के दौरान चीन के बाओ जीई को 5.0 से हराया और यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी जीत साबित हुई।
- इससे पहले लवलीना ने सिल्वर मेडल जीता था और आज अपने इस सिल्वर को इन्होंने गोल्ड में अपग्रेड कर लिया ।
- लवलीना लगातार दो एशियन गेम्स के बॉक्सिंग फाइनल्स में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बन चुकी है।
- सबसे खास बात जिस दिन उन्होंने एशियाई गेम्स फाइनल जीता है उसी दिन पर उनका जन्मदिन है। अर्थात अपने जन्मदिन पर उन्होंने खुद को सबसे बड़ा तोहफा दिया है।
Lovlina Borgohain की कहानी केवल एक मेडल तक सीमित नहीं है। एक ऐसी लड़की जिसके पास ना संसाधन थे ना सुविधा, उसने विपरीत परिस्थितियों में लगातार ट्रेनिंग जारी रखी। ओलंपिक ब्रोंज के बाद वर्ल्ड चैंपियन बनी और एशियाई गेम्स में सिल्वर से गोल्ड तक का सफर पूरा किया। आज 2 अक्टूबर 2026 अपने जन्मदिन पर एशियन गेम्स गोल्ड जितकर लवलीना ने अपने जीवन और करियर में नया अध्याय जोड़ दिया है।
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