क्या और सस्ता होगा सोना? ₹1,44,000 तक गिर सकती है कीमत, जानें 7 अक्टूबर का गोल्ड रेट

Gold Price Today 7 October 2026: सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 7 अक्टूबर 2026 का अंतरराष्ट्रीय बाजार एक अहम संकेत दे रहा है। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की आकर्षकता के बीच सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को बचा पाता है या नहीं।
सोने और चांदी की कीमतों पर क्यों बना हुआ है दबाव?
सोने की कीमतों पर इस समय सबसे बड़ा असर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत आमतौर पर डॉलर में तय होती है। ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर दबाव बन सकता है।
इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। सोने से सीधे तौर पर ब्याज नहीं मिलता, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश करने पर यील्ड के रूप में रिटर्न मिलता है। ऐसे में जब बॉन्ड यील्ड आकर्षक रहती है, तो बड़े निवेशक सोने की तुलना में बॉन्ड को अधिक पसंद कर सकते हैं। इसका असर सोने की कीमतों पर दिखाई देता है।
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सोने के साथ चांदी की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, चांदी धीरे-धीरे कमजोर होकर करीब 60 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके करीब 57 डॉलर प्रति औंस तक जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
अगर चांदी इस स्तर तक पहुंचती है, तो इसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिल सकता है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की बढ़ती आकर्षकता फिलहाल दोनों कीमती धातुओं के लिए प्रमुख दबाव वाले कारकों में शामिल हैं।
भारत के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट (City-Wise Gold Rates Today)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सोने के खुदरा भाव में थोड़ा अंतर हो सकता है। स्थानीय बाजार की स्थिति, टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मार्जिन जैसे कारणों से एक ही दिन में अलग-अलग शहरों में कीमतें पूरी तरह समान नहीं रहती हैं।
7 अक्टूबर 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के प्रति 10 ग्राम सांकेतिक खुदरा भाव इस प्रकार हैं:
| शहर | 22 कैरेट सोना (10 ग्राम) | 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,37,250 | ₹1,49,700 |
| मुंबई | ₹1,37,100 | ₹1,49,570 |
| चेन्नई | ₹1,37,100 | ₹1,49,570 |
| कोलकाता | ₹1,37,100 | ₹1,49,570 |
| बेंगलुरु | ₹1,37,100 | ₹1,49,570 |
नोट: ऊपर दी गई कीमतें सांकेतिक हैं और इनमें 3% वस्तु एवं सेवा कर (GST), टीसीएस या आपके स्थानीय ज्वेलर द्वारा लिए जाने वाले मेकिंग चार्जेस शामिल नहीं हैं। सटीक और अंतिम बिलिंग दरों के लिए अपने नजदीकी सर्राफा बाजार या प्रतिष्ठित शोरूम से संपर्क करें।
भारतीय बाजार के लिए $4,100 का स्तर क्यों है सबसे अहम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों के लिए 4,100 डॉलर प्रति औंस का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस स्तर का असर भारतीय सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,100 डॉलर के आसपास टिकता है, तो भारतीय बाजार में कीमत करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रह सकती है। ऐसे में कीमतों में स्थिरता आने के साथ दोबारा तेजी की संभावना बन सकती है।
वहीं, अगर सोने का भाव 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला जाता है, तो भारतीय बाजार में भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सोने की कीमत करीब 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आने का अनुमान है। इस स्तर के सपोर्ट टूटने पर घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
सोने के साथ चांदी की कीमतों पर भी बाजार की नजर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगातार कमजोर होकर करीब 60 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है। अगर इसका भाव आगे गिरकर 57 डॉलर के अगले सपोर्ट स्तर तक पहुंचता है, तो भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है।
इन 3 बड़े ट्रिगर्स पर टिकी है सोने और चांदी की चाल
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल कैसी रहेगी, यह पूरी तरह से इन वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed): निवेशक फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों पर नजर गड़ाए हुए हैं.
जियो-पॉलिटिकल तनाव: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और तनावपूर्ण स्थिति निवेशकों को फिर से सोने जैसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) की तरफ लौटने पर मजबूर कर सकती है.
कच्चे तेल में उछाल: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर सोने के दाम पर भी पड़ेगा.

