विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को झटका! धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी, सपा के सवाल पर दिया संकेत

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच रुहेलखंड की राजनीति में उस समय हलचल बढ़ गई, जब आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।
बुधवार को मीडिया के सामने आए धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुई घटनाओं और पार्टी के भीतर के माहौल से वह काफी आहत हैं। उन्होंने आगे का राजनीतिक फैसला अभी नहीं बताया है और कहा है कि समर्थकों और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद अगला कदम तय करेंगे।
2024 में करीबी हार के बाद बढ़ी दूरी
धर्मेंद्र कश्यप का भाजपा के साथ राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में आंवला सीट से जीत दर्ज की थी। लगातार दो बार सांसद बनने के बाद 2024 में भी भाजपा ने उन्हें इसी सीट से उम्मीदवार बनाया।
हालांकि, 2024 के चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के बाद से ही धर्मेंद्र कश्यप और भाजपा संगठन के बीच दूरी की चर्चा होती रही थी।
मंगलवार शाम उनके फेसबुक अकाउंट से “टाटा-बाय बाय” लिखा एक पोस्ट सामने आया। इसके बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें तेज हो गईं। अगले दिन उन्होंने इन अटकलों को खत्म करते हुए पार्टी की सदस्यता छोड़ने का ऐलान कर दिया।
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने की क्या वजह बताई?
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने फैसले के पीछे 2024 लोकसभा चुनाव से जुड़ी नाराजगी को प्रमुख कारण बताया। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान कुछ लोगों ने उनके खिलाफ काम किया और उनकी हार में भूमिका निभाई। कश्यप का कहना है कि चुनाव के बाद भी ऐसे लोगों को संगठन में जिम्मेदारी और महत्व दिया गया।
पूर्व सांसद ने कहा कि,
लंबे समय से पार्टी के साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई, जबकि उनके खिलाफ काम करने वालों को आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अनुशासनहीनता के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई।
कश्यप के अनुसार उनका फैसला अचानक नहीं लिया गया है। उन्होंने इसे लंबे समय से महसूस हो रही उपेक्षा और 2024 के चुनाव के बाद बनी परिस्थितियों का परिणाम बताया। भाजपा की ओर से उनके इन आरोपों पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या समाजवादी पार्टी में जाएंगे धर्मेंद्र कश्यप?
भाजपा छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम को लेकर है। जब उनसे समाजवादी पार्टी से संपर्क के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे लेकर पूरी तरह इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि,
वह पहले अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे। इसके बाद ही आगे की राजनीतिक दिशा तय की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, रुहेलखंड में उनकी राजनीतिक पकड़ को देखते हुए समाजवादी पार्टी उनकी तरफ रुचि दिखा रही है। उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के भी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी करने की चर्चा है।
ऐसे में अगर धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं तो उनकी बेटी के भी उसी पार्टी से चुनाव मैदान में उतरने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आंवला और रुहेलखंड की राजनीति पर कितना असर?
धर्मेंद्र कश्यप का प्रभाव केवल आंवला लोकसभा सीट तक सीमित नहीं माना जाता। उन्हें कश्यप और निषाद समुदाय के बीच एक प्रभावशाली स्थानीय चेहरा माना जाता है। भाजपा ने पिछले तीन लोकसभा चुनाव में लगातार उन्हें आंवला से उम्मीदवार बनाया था।
2014 और 2019 में जीत के बाद 2024 में करीबी अंतर से मिली हार ने उनकी राजनीतिक स्थिति को जरूर बदला, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता बनी रही। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले उनका भाजपा छोड़ना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर धर्मेंद्र कश्यप आगे चलकर समाजवादी पार्टी का रुख करते हैं, तो कश्यप और निषाद समुदाय के वोटों को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। इसका असर आंवला लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले कदम की तारीख तय नहीं की है। उन्होंने समर्थकों की बैठक के बाद फैसला सार्वजनिक करने की बात कही है। ऐसे में अब सभी की नजर उनकी अगली बैठक और राजनीतिक घोषणा पर रहेगी।
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