Chrome यूजर्स ध्यान दें! 247 खामियां ठीक करने के लिए आया नया अपडेट, ऐसे करें चेक

Google Chrome इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए सुरक्षा अपडेट से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। गूगल ने 6 अक्टूबर 2026 को नया अपडेट जारी कर कुल 247 सुरक्षा खामियों को ठीक किया है। इनमें चार गंभीर मेमोरी सुरक्षा कमजोरियां भी शामिल हैं। ऐसे में यूजर्स के लिए अपने ब्राउजर का वर्जन चेक करना जरूरी है।
Chrome में चार गंभीर खामियां
गूगल के नए Google Chrome Update में चार गंभीर सुरक्षा कमजोरियों को ठीक किया गया है। ये कमजोरियां ब्राउजर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हैं। कंपनी ने इन्हें यूज-आफ्टर-फ्री (Use-After-Free) श्रेणी में रखा है। यह मेमोरी से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें कोई प्रोग्राम ऐसी मेमोरी का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है जिसे पहले ही खाली किया जा चुका है।
इन कमजोरियों के कारण कुछ परिस्थितियों में ब्राउजर के काम करने के तरीके पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। हालांकि, गूगल ने इन्हें सीधे कोड चलाने वाली खामियों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया है। कंपनी की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि इन कमजोरियों के जरिए सुरक्षा सीमाओं को पार किया जा सकता है या नहीं।
चार गंभीर कमजोरियों में CVE-2026-106382 क्रोमकास्ट से जुड़े हिस्से में मिली। CVE-2026-106197 ब्राउजर, CVE-2026-106358 नेविगेशन और CVE-2026-106347 ट्रैक से संबंधित है। इन समस्याओं की जानकारी जुलाई से सितंबर 2026 के बीच सामने आई थी।
बाकी खामियां किन हिस्सों में मिलीं?
चार गंभीर कमजोरियों के अलावा गूगल ने कई अन्य सुरक्षा समस्याओं को भी ठीक किया है। इनमें ग्राफिक्स, मीडिया, ब्राउजर इंटरफेस और सुरक्षा नियंत्रण से जुड़े हिस्से शामिल हैं। कंपनी ने कुल 247 खामियों को ठीक करने की जानकारी दी है।
CVE-2026-102322 साइट आइसोलेशन में गलत अनुमति से जुड़ी समस्या थी, जबकि CVE-2026-106239 वेबजीएल में इंटीजर ओवरफ्लो से संबंधित थी। इसके अलावा एंगल और वी8 इंजन में भी कई कमजोरियों को दूर किया गया है। इनमें टाइप कन्फ्यूजन, रेस कंडीशन और यूज-आफ्टर-फ्री जैसी समस्याएं शामिल थीं।
नए अपडेट में वेबआरटीसी, वेबऑडियो, पीडीएफ, स्टोरेज, ऑटोफिल, फॉन्ट्स और डेवलपर टूल्स से जुड़े हिस्सों में भी सुधार किए गए हैं। मध्यम और कम गंभीरता वाली समस्याओं में जानकारी के अनधिकृत खुलासे, अनुमति से जुड़ी गड़बड़ियों और संसाधनों के गलत प्रबंधन जैसी कमजोरियां शामिल हैं।
गूगल ने सुरक्षा जांच के लिए एड्रेस सैनिटाइजर, मेमोरी सैनिटाइजर, लिबफजर और एएफएल जैसे टूल्स का भी उल्लेख किया है। सुरक्षा शोधकर्ता शिनयांग जीई ने इनमें से तीन गंभीर कमजोरियों की जानकारी दी थी। कंपनी के अनुसार, कुछ शोध में क्लाउड की सहायता भी ली गई। इससे सुरक्षा कमजोरियों की पहचान में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का पता चलता है।
अपने Chrome को अभी अपडेट करें
गूगल ने विंडोज और मैक यूजर्स के लिए Chrome का नया वर्जन 155.0.8059.39/.40 जारी किया है। वहीं, लिनक्स यूजर्स के लिए वर्जन 155.0.8059.39 उपलब्ध कराया गया है। इन वर्जन में सुरक्षा से जुड़े सुधार शामिल हैं।
यूजर्स को अपने कंप्यूटर पर ब्राउजर का मौजूदा वर्जन जांचना चाहिए। इसके लिए Google Chrome खोलें और ऊपर दाईं ओर तीन डॉट वाले मेन्यू पर क्लिक करें। इसके बाद Help में जाकर About Google Chrome चुनें। यहां ब्राउजर अपने उपलब्ध अपडेट की जांच करेगा। यदि अपडेट उपलब्ध है, तो उसे इंस्टॉल करें और जरूरत पड़ने पर Chrome को दोबारा शुरू करें।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अपडेट सभी कंप्यूटरों तक एक ही समय पर नहीं पहुंचता। इसलिए यदि नया वर्जन अभी दिखाई नहीं देता, तो कुछ समय बाद दोबारा जांच करना उपयोगी हो सकता है।
गूगल ने इन कमजोरियों के वास्तविक हमलों में इस्तेमाल होने की स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में इनके दुरुपयोग की आशंका नहीं है। ऐसे में यूजर्स और संस्थानों के लिए ब्राउजर को नवीनतम उपलब्ध सुरक्षा संस्करण पर रखना जरूरी है।
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