आज़ादी के बाद पहली बार खुलेगा देश का प्राइवेट गोल्ड माइन, जानिए कहां से निकलेगा भारत का असली सोना

आज़ादी के बाद पहली बार खुलेगा देश का प्राइवेट गोल्ड माइन, जानिए कहां से निकलेगा भारत का असली सोना

India Gold Mine: भारत में अब वो ऐतिहासिक पल आने वाला है जब सोने की चमक सिर्फ बाज़ारों में नहीं, बल्कि भारतीय धरती से भी झलकेगी। आज़ादी के बाद पहली बार देश में एक निजी सोने की खदान (Private Gold Mine) से उत्पादन शुरू होने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित जोनागिरी (Jonnagiri Gold Project) अक्टूबर 2025 से पूरी क्षमता के साथ सोने का उत्पादन शुरू करेगा।

Jonnagiri Gold Project: हर साल निकलेगा 1 टन सोना

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयात करने वाला देश है। हर साल अरबों डॉलर विदेशों में खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन अब जोनागिरी प्रोजेक्ट इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। बता दें, इस सोने की खदान से शुरुआती दौर में लगभग 500 किलो सोना प्रतिवर्ष निकलेगा, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 1 टन प्रति वर्ष करने की योजना है।

यह उत्पादन भारत की मौजूदा घरेलू क्षमता (करीब 1.5 टन सालाना) में बड़ा इज़ाफा करेगा। इस परियोजना का संचालन Geomysore Services (India) Pvt. Ltd. कर रही है, जिसका लक्ष्य अगले 15 वर्षों तक हर साल करीब 1,000 किलो परिष्कृत सोना निकालने का है। गौरतलब है कि भारत हर साल सोने के आयात पर अरबों डॉलर खर्च करता है, जिससे देश का फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व दबाव में आता है।

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खदान की क्षमता और वैज्ञानिक आधार

नई सोने की खदान के चालू होने से उम्मीद है कि भारत का सोना आयात बिल कुछ हद तक घटेगा और देश की वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। यह कदम सीधे तौर पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन से जुड़ा है, यानी देश की ज़रूरतें अब अपने ही संसाधनों से पूरी होंगी।

खास तौर पर, जोनागिरी प्रोजेक्ट के पास JORC प्रमाणित सोने का भंडार 13.1 टन है। JORC रिपोर्ट ऑस्ट्रेलियन कोड के अनुसार तैयार की जाती है, जो किसी भी खनिज परियोजना की विश्वसनीयता दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल संभावित भंडार करीब 42.5 टन (1.5 मिलियन औंस) तक हो सकता है यानी आने वाले दशकों तक भारत को सोना यहीं से मिल सकता है।

पूरी हो चुकी हैं सभी सरकारी मंज़ूरियाँ

बता दें की जोनागिरी प्रोजेक्ट को Environmental Clearance (EC) और Consent to Operate (CTO) मिल चुका है। आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 0.3 MTPA अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र और 0.4 MTPA खनन कार्य की अनुमति दी है। ट्रायल रन लगभग पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2025 के अंत तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।

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Jonnagiri Gold Project के पीछे कौन है असली ताकत?

Jonnagiri Gold Project के संचालन की कमान संभाली है देश के जाने-माने खनन उद्योगपति बी. प्रभाकरण (B. Prabhakaran) और उनके परिवार ने। प्रभाकरण की Thriveni Earthmovers, Prakar और Lloyds Limited कंपनियां इस परियोजना की रीढ़ मानी जा रही हैं और इनके पास मिलकर करीब 70% हिस्सेदारी है। वहीं, देश की प्रमुख गोल्ड माइनिंग कंपनी Deccan Gold Mines Ltd. की इसमें 27.27% भागीदारी है।

Thriveni Earthmovers न सिर्फ खदान का संचालन करेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से सोना निकालने की जिम्मेदारी भी निभाएगी। बता दें कि Thriveni Earthmovers पहले से ही ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में कई सफल खनन परियोजनाओं पर काम कर चुकी है। ऐसे में उम्मीद है कि प्रभाकरण का अनुभव और तकनीकी दक्षता भारत की इस पहली Private Gold Mine को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।

प्रभाकरण का कहना है, “जोनागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूत करता है और देश को रणनीतिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।”

आज़ादी के बाद पहली बार खुलेगा निजी सोने का खदान

बता दें, आज़ादी के बाद से अब तक कोई भी बड़ी निजी सोने की खदान पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं हो पाई थी। लाइसेंसिंग और खनन नीति की जटिलताओं के कारण निजी निवेशक पीछे हटते रहे। लेकिन जोनागिरी प्रोजेक्ट के साथ भारत अब गोल्ड माइनिंग सेक्टर में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ चुका है। यह न केवल रोजगार और राजस्व बढ़ाएगा, बल्कि तकनीकी नवाचार और विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेगा।

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अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो आने वाले वर्षों में और भी निजी गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट्स भारत में शुरू हो सकते हैं। सरकार पहले ही क्रिटिकल मिनरल्स पॉलिसी के तहत गोल्ड, लिथियम और रेयर अर्थ मेटल्स के लिए नई नीतियाँ तैयार कर रही है। इससे आने वाले समय में भारत न केवल सोना उपभोक्ता देश, बल्कि उत्पादक देश भी बन सकता है।

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