बिहार को पहली बार मिलेगा गंगा जल का अधिकार, 900 क्यूसेक पानी पर केंद्र की बड़ी तैयारी

Bihar Ganga Water Share 900 Cusec
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Bihar Ganga Water Share: अब तक गंगाजल के उपयोग को लेकर केंद्र की ओर टकटकी लगाए बैठे बिहार के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। पहली बार ऐसा हो सकता है जब गंगा नदी के पानी में बिहार को आधिकारिक और तय हिस्सेदारी मिले। खास बात है की केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की एक आंतरिक समिति ने बिहार को 900 क्यूसेक गंगाजल देने की अनुशंसा की है।

हालाकी अभी अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद बिहार के हिस्से में गंगाजल आने का रास्ता अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है।

गंगाजल में बिहार की हिस्सेदारी क्यों है ऐतिहासिक?

बता दें कि अब तक गंगा नदी के पानी में बिहार का कोई भी तय या आधिकारिक हिस्सा नहीं रहा है, जबकि राज्य की बड़ी आबादी, खेती-किसानी, पीने का पानी और उद्योगों की जरूरतें काफी हद तक गंगा पर ही निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को पहले से गंगाजल के उपयोग की अनुमति मिलती रही, लेकिन बिहार इस दौड़ में पीछे रह गया था।

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अब अगर बिहार को 900 क्यूसेक गंगाजल इस्तेमाल करने की मंजूरी मिलती है, तो यह पहली बार होगा जब केंद्र सरकार की ओर से राज्य को गंगा जल में साफ तौर पर निर्धारित हिस्सेदारी दी जाएगी। गौरतलब है कि इसे बिहार के जल अधिकार की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में राज्य की जल जरूरतों को मजबूती मिल सकती है।

कब मिलेगा बिहार को लाभ?

बता दें की केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में बिहार को शुष्क मौसम के दौरान गंगाजल उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। समिति के मुताबिक जनवरी से मई तक का समय वह होता है, जब गंगा नदी में पानी सबसे कम रहता है, और इसी अवधि में बिहार को गंगा का पानी देने का सुझाव दिया गया है।

मानसून आने से ठीक पहले लगातार पांच महीनों तक करीब 900 क्यूसेक गंगाजल नियंत्रित और योजनाबद्ध तरीके से देने की बात कही गई है। हालाकी बिहार सरकार ने इससे कहीं ज्यादा, यानी दो हजार क्यूसेक पानी की मांग रखी थी, लेकिन पहली बार गंगाजल में तय हिस्सेदारी की दिशा में उठाया गया यह कदम राज्य के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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बिहार सरकार का कहना है कि,

बढ़ती आबादी, सिंचाई योजनाएं, शहरी पेयजल जरूरतें और भविष्य की औद्योगिक मांगों को देखते हुए ज्यादा पानी जरूरी है, क्योंकि गर्मी के मौसम में कई जिलों में हैंडपंप सूख जाते हैं, नदियों और सहायक नालों का जलस्तर गिर जाता है और किसानों को सिंचाई में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे हालात में गंगाजल की नियमित आपूर्ति बिहार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

क्यों अटका है अंतिम फैसला?

हालाकी गंगाजल को लेकर समिति की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन जल शक्ति मंत्रालय ने अभी तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। इसकी बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि कुछ अन्य राज्यों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

इसके अलावा गंगा नदी के पानी का मौसमी प्रवाह भी एक अहम कारण है, क्योंकि शुष्क मौसम में जलस्तर काफी नीचे चला जाता है। हालांकि, खास बात यह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की सिफारिश के बाद बिहार के लिए गंगाजल मिलने का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो चुका है और जल्द कोई सकारात्मक फैसला आ सकता है।

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बांग्लादेश को गंगा जल देने पर बिहार ने जताई कड़ी आपत्ति

बता दें की हाल के दिनों में बिहार सरकार ने गंगा नदी का पानी बांग्लादेश को दिए जाने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी और प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ बैठक कर साफ तौर पर कहा कि गंगा जल के किसी भी समझौते में बिहार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

बिहार ने मांग रखी है कि गंगा जल समझौते में राज्य को भी पक्षकार बनाया जाए, पानी के बंटवारे में बिहार की जरूरतों को प्राथमिकता मिले और भविष्य की सभी जल योजनाओं में राज्य की भागीदारी तय की जाए। गौरतलब है की अब तक अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में बिहार की सीधी भूमिका नहीं रही है।

हालाकी अगर बिहार को 900 क्यूसेक गंगाजल की मंजूरी मिल जाती है, तो इससे पेयजल संकट में राहत, सिंचाई परियोजनाओं को मजबूती, शहरी जल आपूर्ति में सुधार और आने वाली जल योजनाओं का रास्ता खुल सकता है, जिससे बिहार की जल नीति और केंद्र-राज्य संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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