बक्सर: खुल गया इटाढ़ी रेलवे गुमटी, क्षतिग्रस्त ओवरब्रिज मुद्दे पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

बक्सर के पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग L.C. No. 70-B को आम लोगों के लिए फिर से खोल दिया गया है। इस मांग को लेकर सरोज कुमार राजभर उर्फ सरोज राजभर की ओर से पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। हालांकि, रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त पिलर की मरम्मत और उसकी तकनीकी सुरक्षा से जुड़े सवाल अभी बाकी हैं।
पटना हाईकोर्ट पहुंचा बक्सर रेलवे क्रॉसिंग का मामला
बक्सर पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग (Buxar East Railway Crossing) को आम लोगों के लिए दोबारा खोलने और रेलवे ओवरब्रिज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सरोज कुमार राजभर की ओर से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत C.W.J.C. No. 13634 of 2026 दाखिल की गई थी।
याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई थीं। इनमें पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को जनता के लिए फिर से खोलना, रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त या धंसे हुए पिलर की समयबद्ध मरम्मत और पुल की तकनीकी स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन शामिल था।
याचिका के अनुसार, रेलवे ओवरब्रिज के एक पिलर के धंसने के बाद पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को बंद कर दिया गया था। इसके बाद बक्सर शहर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को आने-जाने में परेशानी होने लगी। इस समस्या को लेकर सरोज राजभर की ओर से 2 जुलाई और 11 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन दिए गए थे।
याचिका में यह भी बताया गया कि अधिकारियों की ओर से 2 जुलाई और 9 जुलाई 2026 को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित स्तर पर अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं होने पर मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंचा।
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इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह स्थिति दर्ज की गई कि याचिका में मांगी गई राहत के एक हिस्से से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं।
दरअसल, बक्सर की पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को आम जनता के इस्तेमाल के लिए खोल दिया गया है। ऐसे में याचिका में क्रॉसिंग को दोबारा खोलने से जुड़ी मांग पर स्थिति बदल गई है। जिस रास्ते को बंद किए जाने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, वह अब लोगों के आवागमन के लिए उपलब्ध है।
यह बदलाव मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, इससे पूरी याचिका का मामला खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि रेलवे ओवरब्रिज की सुरक्षा और मरम्मत से जुड़े मुद्दे अभी भी अदालत के सामने हैं।
ROB के पिलर और तकनीकी जांच पर फैसला बाकी
रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के धंसे हुए पिलर की मरम्मत, पुल की तकनीकी स्थिति की जांच और आवश्यक मरम्मत के लिए समय-सीमा तय करने से जुड़े प्रश्न अभी विचाराधीन हैं। याचिका में पुल की स्थिति की विशेषज्ञ जांच के लिए समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादी संख्या 1 से 7 को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर री-ज्वाइंडर दाखिल करने का अवसर मिलेगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होनी है। उस सुनवाई में रेलवे ओवरब्रिज की तकनीकी स्थिति, धंसे हुए पिलर की मरम्मत और इससे संबंधित कार्रवाई को लेकर आगे की न्यायिक प्रक्रिया सामने आएगी।
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सरोज राजभर ने इस मामले को बक्सर के आम लोगों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि अधिकारियों के स्तर पर समस्या उठाने के बाद न्यायालय का रुख किया गया। क्रॉसिंग का दोबारा खुलना राहत की बात है, लेकिन ROB की सुरक्षा और पिलर की मरम्मत से जुड़े सवालों का समाधान भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बक्सर के लोगों की सुविधा, सुरक्षा और अधिकार से जुड़ा है। अब 27 अक्टूबर की सुनवाई पर स्थानीय लोगों की नजर रहेगी, क्योंकि इसी प्रक्रिया में रेलवे ओवरब्रिज की सुरक्षा से जुड़े बाकी मुद्दों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

