बिहार में NDA का क्लीन स्वीप! राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत, महागठबंधन को बड़ा झटका

बिहार में NDA का क्लीन स्वीप! राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत, महागठबंधन को बड़ा झटका

बिहार की राजनीति में आज बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव (Bihar Rajya Sabha Election 2026) में NDA ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचों सीटों पर जीत हासिल कर ली। इस नतीजे ने महागठबंधन की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। बता दें कि इस चुनाव में NDA के सभी उम्मीदवार जीतने में सफल रहे, जबकि महागठबंधन का एकमात्र उम्मीदवार भी जीत नहीं सका।

बिहार राज्यसभा चुनाव में NDA की मजबूत जीत

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA ने पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरकर जीत हासिल की। अंतिम नतीजों के अनुसार, नीतीश कुमार और नितिन नबीन को सबसे ज्यादा 44-44 प्रथम वरीयता वोट मिले। इसके बाद रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 प्रथम वरीयता वोट प्राप्त हुए।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम को केवल 30 प्रथम वरीयता वोट मिले। लेकिन गौरतलब है कि उन्हें दूसरे वरीयता वोटों का फायदा मिला और इसी के आधार पर उन्होंने आखिरी सीट जीत ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि NDA की एकजुट रणनीति और विधायकों की पूरी मौजूदगी ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई।

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महागठबंधन की रणनीति कमजोर पड़ी

इस चुनाव में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा। गठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह धारी को हार का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि,

महागठबंधन के भीतर समन्वय की कमी और रणनीतिक चूक इस हार की बड़ी वजह बनी। मतदान के दिन गठबंधन के चार विधायक विधानसभा तक पहुंच ही नहीं सके।

हालांकि, अगर ये सभी विधायक मतदान में शामिल होते तो महागठबंधन की स्थिति कुछ बेहतर हो सकती थी। लेकिन उनकी गैरहाजिरी ने पूरे समीकरण को बदल दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि,

विपक्ष की आंतरिक खींचतान और कमजोर रणनीति के कारण NDA को साफ बढ़त मिल गई।

क्यों हुए थे ये चुनाव?

यह चुनाव कई वरिष्ठ नेताओं के राज्यसभा से रिटायर होने के कारण कराया गया। जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर 9 अप्रैल को अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। इसी के साथ राष्ट्रीय जनता दल के अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं।

अगर विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो NDA को पहले से ही बढ़त हासिल थी। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 89 विधायक हैं, जो अकेले दो सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के पास 85 विधायक हैं।

वहीं NDA के अन्य सहयोगियों में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19 विधायक, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 5 विधायक और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक शामिल हैं। इन सभी के समर्थन से NDA का संख्या बल काफी मजबूत हो गया, जिसका सीधा फायदा राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला।

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देशभर में भी हो रहे हैं राज्यसभा चुनाव

बताते चलें कि इस चुनाव चक्र में पूरे देश में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। बाकी 11 सीटों पर मतदान कराया गया, जिनमें बिहार की पांच सीटें भी शामिल थीं। इसके अलावा ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटों पर भी मतदान हुआ है।

हालांकि इन राज्यों के नतीजों का अभी आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। लेकिन बिहार के नतीजों ने साफ संकेत दे दिया है कि NDA ने यहां राजनीतिक बढ़त कायम कर ली है।

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