भारत सरकार ला सकती है 37,500 करोड़ की बड़ी योजना, कोयले से गैस बनाने पर लगेगा दांव
Coal Gasification Scheme: भारत सरकार जल्द ही एक बड़े फैसले पर मुहर लगा सकती है। खबर है कि कैबिनेट जल्द 37,500 करोड़ की नई प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे सकती है, जिसका मकसद देश में कोल गैसीफिकेशन स्कीम को तेज करना है। अगर ऐसा होता है तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और विदेशों से होने वाले कई जरूरी आयात पर निर्भरता घट सकती है।
Coal Gasification Scheme क्या है?
कोल गैसीफिकेशन स्कीम ऐसी तकनीक पर आधारित योजना है, जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है। इस गैस का इस्तेमाल ईंधन, खाद, केमिकल और बिजली बनाने में किया जा सकता है। सरकार की नई योजना का मकसद देशभर में सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना है, ताकि घरेलू संसाधनों का सही उपयोग हो और भारत आत्मनिर्भर बने।
बता दें कि सरकार ने साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसीफिकेशन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है, और यह नई कोयला योजना उसी दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
योजना से किन आयातों पर कम होगी निर्भरता?
अगर सरकार की यह कोयला योजना मंजूर होती है, तो भारत कई जरूरी चीजों के आयात पर अपनी निर्भरता घटा सकता है। इसमें एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, कोकिंग कोल, मेथनॉल और डीएमई जैसी अहम वस्तुएं शामिल हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर असर देखने को मिला, जिससे भारत जैसे देशों के सामने जोखिम बढ़ा।
ऐसे में घरेलू कोयले से गैस, उर्वरक और केमिकल तैयार करना बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी, किसानों को खाद मिलने में मदद मिलेगी, उद्योगों को सपोर्ट मिलेगा और सप्लाई संकट के समय देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो सकेगी।
नई कोयला योजना से किन परियोजनाओं को होगा फायदा?
सूत्रों के मुताबिक सरकार की नई एकीकृत योजना में अलग-अलग श्रेणियां नहीं होंगी और किसी एक परियोजना को अधिकतम 3,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। बता दें कि पुरानी योजना में निजी कंपनियों को 1,000 करोड़ रुपये और पीएसयू कंपनियों को 1,350 करोड़ रुपये तक मदद मिलती थी, लेकिन अब यह राशि काफी बढ़ाई जा सकती है।
भारत के पास करीब 401 बिलियन टन कोयला भंडार है, जो दुनिया के बड़े भंडारों में शामिल है। अगर इसका सही तकनीक के साथ उपयोग किया जाए तो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक खुद पूरा कर सकता है। आज भी भारत की कुल ऊर्जा जरूरतों में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से ज्यादा है और आने वाले समय में बढ़ती मांग के बीच इसकी अहमियत और बढ़ सकती है।
निवेश और नौकरियों पर कितना असर पड़ेगा?
अगर इस कोयला योजना को हरी झंडी मिल जाती है तो कोल गैसीफिकेशन सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश आने की संभावना है। इससे नई फैक्ट्रियां, नई परियोजनाएं और कई इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। बता दें कि इससे युवाओं को तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों तरह की नौकरियां मिल सकती हैं।
साथ ही भारत स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि में फायदा मिलने की उम्मीद है।
