चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, सरकार ने दिवाली से पहले खोला 16 लाख टन का रास्ता

Government Increases Sugar Sale Quota: दिवाली से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। मिठाइयों की मांग बढ़ने से पहले केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में घरेलू चीनी मिलों और आयातकों को कुल 16 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। अब सवाल है कि क्या इस फैसले से बाजार में कीमतों को काबू रखने में मदद मिलेगी?
सरकार ने कितना चीनी कोटा दिया?
खाद्य मंत्रालय के आदेश के अनुसार, 16 से 31 अक्टूबर के बीच घरेलू चीनी मिलें 14 लाख टन चीनी बेच सकेंगी। इसके अलावा, आयातकों को 2 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। सरकार ने तय समय से दो दिन पहले ही बिक्री कोटे की घोषणा कर दी, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सके।
पिछले 10 दिनों में चीनी मिलों से बिकने वाली चीनी की कीमत में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश में मिल स्तर पर कीमत लगभग 4,450 रुपये से बढ़कर 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। वहीं, महाराष्ट्र में यह कीमत करीब 5,100 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है।
सरकार को उम्मीद है कि बिक्री के लिए अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध होने से बाजार में चीनी की कमी की आशंका कम होगी। हालांकि, इसका असर खुदरा कीमतों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में आपूर्ति और मांग पर निर्भर करेगा।
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दिवाली से पहले बढ़ी मांग की चिंता
दिवाली के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ने की संभावना है। इसी वजह से सरकार ने अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े का कोटा पहले घोषित किया है। दशहरे के लिए चीनी की मांग लगभग पूरी हो चुकी है और अब बाजार की नजर दिवाली की जरूरतों पर है।
कुछ चीनी मिलें अक्टूबर के पहले पखवाड़े में अपना तय बिक्री कोटा इस्तेमाल कर चुकी थीं। ऐसे में उनके पास आगे बेचने के लिए उपलब्ध मात्रा सीमित हो गई थी। बाजार में स्टॉक कम होने की आशंका और मिल स्तर पर बढ़ती कीमतों के पीछे इसे भी एक कारण माना जा रहा है।
खुदरा बाजार में भी कुछ जगहों पर तेजी दिखाई दी है। दिल्ली के कुछ इलाकों में चीनी की कीमत दो से तीन दिनों के भीतर 60 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। दूसरी ओर, ओडिशा के सोनपुर में चीनी 50 से 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इससे साफ है कि अलग-अलग बाजारों में कीमतों का स्तर एक जैसा नहीं है।
महाराष्ट्र और यूपी को मिला सबसे ज्यादा कोटा
देश के तीन प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक को घरेलू मिलों के लिए तय 14 लाख टन के कोटे में से कुल 11.59 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है। यह कुल आवंटन का करीब 83 फीसदी है।
महाराष्ट्र को 4.76 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.51 लाख टन और कर्नाटक को 2.32 लाख टन का कोटा दिया गया है। देश की 587 चीनी मिलों में से 134 को इस अवधि के लिए कोई कोटा नहीं मिला है, जबकि 39 मिलों को 100 टन तक का कोटा आवंटित किया गया है।
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चीनी उत्पादन बढ़ने से मिलेगी राहत?
चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उत्पादन बढ़ना भी जरूरी माना जा रहा है। महाराष्ट्र में 30 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है और अगले कुछ दिनों में 10 अन्य मिलों के शुरू होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में भी करीब 10 से 15 मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर सकती हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बेचने के लिए मिलों को बिक्री कोटे का इंतजार नहीं करना होगा। इससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ सकती है। सितंबर के अंत में देश के पास 32 से 35 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक होने का अनुमान था, जबकि नवंबर में मांग करीब 24 से 25 लाख टन रह सकती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए अक्टूबर में लगभग 12 से 13 लाख टन चीनी का उत्पादन जरूरी माना जा रहा है।
ऐसे में दिवाली से पहले चीनी की कीमतों पर सरकार के फैसले के साथ-साथ मिलों के उत्पादन और बाजार में वास्तविक आपूर्ति का भी असर पड़ेगा। यदि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम रहती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

