आखिर कितने किलो गन्ने से बनती है आपके घर की 1 किलो चीनी? असली आंकड़ा जानकर चौंक जाएंगे

Sugarcane To Sugar Production
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चीनी की कीमतें कई शहरों में करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बीच यह सवाल भी लोगों के मन में आ रहा है कि आखिर इतनी चीनी बनाने के लिए कितने गन्ने की जरूरत पड़ती है। सामान्य तौर पर 100 किलो गन्ने से करीब 9 से 10 किलो चीनी मिलती है। हालांकि यह मात्रा हर बार एक जैसी नहीं होती।

100 किलो गन्ने से कितनी चीनी निकलती है?

अगर किसी चीनी मिल में गन्ने की रिकवरी करीब 10 प्रतिशत है, तो 100 किलो गन्ने से लगभग 10 किलो चीनी तैयार (Sugarcane to Sugar) हो सकती है। इसी आधार पर आम तौर पर माना जाता है कि 1 किलो चीनी बनाने के लिए करीब 9 से 10 किलो गन्ने की जरूरत होती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर 100 किलो गन्ने से ठीक 10 किलो चीनी ही निकलेगी। चीनी की वास्तविक मात्रा कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। गन्ने की किस्म, उसकी गुणवत्ता, उसमें मौजूद चीनी की मात्रा और मिल की प्रोसेसिंग क्षमता जैसे कारक चीनी की अंतिम रिकवरी को प्रभावित करते हैं।

ICAR (Indian Institute of Sugarcane Research) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2023-24 के दौरान औसत चीनी रिकवरी करीब 10.3 प्रतिशत रही थी। यानी औसतन 100 किलो गन्ने से लगभग 10.3 किलो चीनी की रिकवरी के बराबर उत्पादन क्षमता रही।

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क्या होती है Sugar Recovery?

चीनी की रिकवरी दर (Sugar Recovery) का मतलब है कि किसी तय मात्रा में गन्ने से चीनी मिल कितनी मात्रा में चीनी निकाल पाती है। इसे गन्ने से चीनी उत्पादन की क्षमता समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।

मान लीजिए किसी गन्ने की रिकवरी 10 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ है कि 100 किलो गन्ने से करीब 10 किलो चीनी की रिकवरी हो सकती है। अगर रिकवरी इससे ज्यादा है तो उतने ही गन्ने से अधिक चीनी प्राप्त हो सकती है। वहीं कम रिकवरी होने पर 1 किलो चीनी बनाने के लिए ज्यादा गन्ने की आवश्यकता पड़ सकती है।

रिकवरी पर गन्ने की गुणवत्ता और किस्म का भी असर पड़ता है। जिस गन्ने में चीनी की मात्रा बेहतर होती है, उससे समान वजन के गन्ने से ज्यादा चीनी प्राप्त होने की संभावना रहती है। दूसरी ओर कम गुणवत्ता वाले गन्ने से चीनी की रिकवरी घट सकती है।

बाकी गन्ने का क्या होता है?

अब सवाल उठता है कि अगर 100 किलो गन्ने से करीब 9 से 10 किलो ही चीनी बनती है, तो बाकी गन्ना कहां जाता है? दरअसल, गन्ने का बाकी हिस्सा पूरी तरह बेकार नहीं होता। गन्ने से रस निकालने के बाद बचने वाले रेशेदार पदार्थ को बैगास कहा जाता है। चीनी मिलों में इसका इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जाता है। इससे बिजली बनाने में भी मदद मिलती है।

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गन्ने से चीनी बनाने के दौरान शीरा (Molasses) भी प्राप्त होता है। इसका इस्तेमाल कई दूसरे उत्पादों को तैयार करने में किया जाता है। इसलिए गन्ने का इस्तेमाल केवल क्रिस्टल चीनी बनाने तक सीमित नहीं है। यानी 100 किलो गन्ने का पूरा हिस्सा सीधे चीनी में नहीं बदलता, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि बाकी हिस्सा बर्बाद हो जाता है। चीनी उद्योग में गन्ने से मिलने वाले अलग-अलग उत्पादों और उप-उत्पादों का भी उपयोग किया जाता है।

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