5 साल बाद PM मोदी करेंगे चीन दौरा… पर डोभाल ने चल दिया बड़ा चाल, क्या अब बदलेगा एशिया का पावर बैलेंस?

India China Meeting NSA Ajit Doval and Wang Yi
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India China Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी चीन दौरे से ठीक पहले एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम होने जा रहा है। दरसल चीनी विदेश मंत्री वांग यी 18 अगस्त को भारत पहुंचेंगे और यहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात उस समय हो रही है जब पीएम मोदी पांच साल बाद पहली बार चीन जा रहे हैं, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे। यह दौरा खास है क्योंकि 2020 के लद्दाख सीमा विवाद के बाद से भारत और चीन के बीच रिश्तों में तनाव रहा है।

India China Meet: पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले कूटनीतिक हलचल तेज

वांग यी का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग और दिल्ली, दोनों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए हैं। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% का ‘पेनल्टी’ टैक्स रूस से हथियार और तेल खरीदने के लिए जोड़ा गया है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिका और चीन के बीच आयात शुल्क को लेकर टिट-फॉर-टैट जंग छिड़ गई थी।

वॉशिंगटन ने चीनी आयात पर 145% ड्यूटी लगाई, जबकि बीजिंग ने अमेरिकी सामान पर 125% ड्यूटी का पलटवार किया। मार्च में, जब अमेरिका ने चीन पर केवल 20% ड्यूटी लगाई थी, तब वांग यी ने भारत और चीन से अपील की थी कि वे एकजुट होकर “हैजेमनिज्म और पावर पॉलिटिक्स” का विरोध करें। उन्होंने कहा था,

“ड्रैगन और एलीफेंट का डांस ही सही रास्ता है… हमें एक-दूसरे को कमजोर करने के बजाय सपोर्ट करना चाहिए और सहयोग को मजबूत करना चाहिए।”

लद्दाख विवाद में ‘पॉजिटिव स्ट्राइड्स’

पिछले साल लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों में सैन्य डिसएंगेजमेंट ने भारत-चीन रिश्तों में नई जान फूंक दी। 2020 की झड़पों के बाद यह कदम एक बड़ी सकारात्मक प्रगति माना गया। भारत ने इस पहल का स्वागत करते हुए तीर्थयात्रा बहाल करने, सीधी उड़ानें शुरू करने और पत्रकारों के आदान-प्रदान जैसे उपायों पर जोर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कदम न सिर्फ सीमा तनाव घटाएंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग भी बढ़ाएंगे।

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क्या तियानजिन में तय होगा नए विश्व संतुलन का ब्लूप्रिंट?

31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाला SCO समिट 2025 अब तक का सबसे बड़ा मंच साबित हो सकता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। इस समिट के दौरान पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आमने-सामने बातचीत कर सकते हैं। माना जा रहा है कि बैठक में यूक्रेन युद्ध, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होगी, जो एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

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बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे और NSA अजीत डोभाल की वांग यी से होने वाली मुलाकात से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। यह वार्ता लद्दाख सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में नई पहल का रास्ता खोल सकती है। साथ ही, भारत-चीन के बीच व्यापार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को नया आयाम देने की संभावना भी है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर साझा रणनीति और SCO जैसे मंचों के जरिए बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना भी एजेंडे में हो सकता है।

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