रूस के साथ भारत की बड़ी डील, अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर तैनात करेंगे 3000 सैनिक

रूस के साथ भारत की बड़ी डील, अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर तैनात करेंगे 3000 सैनिक

भारत और रूस के बीच एक ऐसा रक्षा समझौता सामने आया है, जिसने रणनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर हजारों सैनिक, युद्धपोत और विमान तैनात कर सकेंगे। आखिर इस डील के पीछे क्या है असली मकसद, और इसका भारत की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? बता दें कि यह समझौता आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।

भारत-रूस RELOS समझौता क्या है?

भारत और रूस के बीच 2025 में हुआ RELOS समझौता अब आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है, जिसे दिसंबर 2025 में रूस ने कानून बनाकर मंजूरी दी। बता दें कि इस डील के तहत दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर एक साथ 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान तैनात कर सकते हैं।

यह व्यवस्था 5 साल के लिए होगी और जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस समझौते में सीमाएं तय की गई हैं ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग संतुलित और नियंत्रित तरीके से चलता रहे।

क्यों खास है यह भारत-रूस रक्षा समझौता?

यह समझौता (India Russia Defence Pact) सिर्फ सैनिक तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद भारत और रूस के बीच लंबे समय तक मजबूत सैन्य साझेदारी बनाना है। इससे दोनों देश मिलकर सैन्य अभ्यास, ट्रेनिंग और जरूरत पड़ने पर मानवीय मिशन भी आसानी से कर सकेंगे।

यह डील ऐसे समय पर आई है जब रूस यूक्रेन के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है, इसलिए इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। कुल मिलाकर, यह समझौता दोनों देशों के बीच भरोसा मजबूत करेगा और साथ मिलकर काम करने की क्षमता को और बेहतर बनाएगा।

भारत-रूस डील से सेना को क्या मिलेगा फायदा?

इस समझौते के बाद भारत और रूस की सेनाओं को एक-दूसरे के एयरबेस और पोर्ट इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी, जिससे ऑपरेशन तेज और आसान हो जाएंगे। अब युद्धपोतों को दूसरे देश में ही मरम्मत, पानी, खाना और जरूरी तकनीकी मदद मिल सकेगी।

वहीं सैन्य विमानों को उड़ान से जुड़ी जानकारी, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और बाकी जरूरी सेवाएं भी वहीं उपलब्ध होंगी। हालांकि यह सहयोग तय नियमों के तहत होगा, ताकि संतुलन बना रहे। कुल मिलाकर यह डील दोनों देशों की सैन्य ताकत को और मजबूत करेगी।

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