पेट्रोल-डीजल फिर महंगा! 4 साल बाद बढ़े दाम, सफर से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक सब पर पड़ेगा सीधा असर
Fuel Price Hike May 2026: भारत में करीब चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार सुबह तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है और आने वाले हफ्तों में आम लोगों को और महंगे ईंधन का सामना करना पड़ सकता है।
बता दें कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतें आगे भी बढ़ेंगी।
क्यों बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम?
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। फरवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके पीछे मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और तेल सप्लाई पर असर को बड़ी वजह माना जा रहा है।
गौरतलब है कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया। इसका असर यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे तेल निर्यातक देशों पर भी पड़ा। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते दबाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है।
हालांकि, भारत ने पिछले कई हफ्तों तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। इस दौरान तेल विपणन कंपनियां यानी OMCs लगातार नुकसान झेल रही थीं। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों को हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था।
क्या आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे दाम?
विशेषज्ञों का कहना है कि,
3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी तेल कंपनियों के नुकसान को पूरी तरह कम करने के लिए काफी नहीं है। ICRA के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है, तो कंपनियों को अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 14 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों ने 20 से 25 रुपये तक की संभावित बढ़ोतरी की आशंका भी जताई है।
हालांकि, सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा। क्योंकि ईंधन महंगा होने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा होता है और फिर खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ने लगती हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। दूध, सब्जी, राशन और दूसरी जरूरी चीजों की ढुलाई महंगी होने से बाजार में महंगाई बढ़ सकती है। हाल ही में अमूल और मदर डेयरी ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।
कंपनियों ने इसके पीछे बढ़ती लॉजिस्टिक लागत को एक वजह बताया है। इससे साफ है कि ईंधन की कीमतों का असर अब दूसरे सेक्टर में भी दिखने लगा है। फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट के राहुल आहलूवालिया का कहना है कि,
कीमतों का वास्तविक स्थिति के अनुसार बढ़ना जरूरी है। अगर लंबे समय तक कीमतों को कृत्रिम तरीके से रोका जाए, तो बाद में बड़ी आर्थिक परेशानी और झटका देखने को मिल सकता है।
हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गरीब और मध्यम वर्ग को महंगाई के असर से बचाने की होगी। खासकर मजदूर और छोटे आय वाले परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की मौजूदा 3 रुपये की बढ़ोतरी शायद आखिरी नहीं है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में लोगों को और महंगे ईंधन के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
