बक्सर की राजनीति में बड़ा उलटफेर, नियामतुल्लाह फरीदी ने थामा जदयू का दामन, बदलेंगे सियासी समीकरण

बक्सर की राजनीति में बड़ा उलटफेर, नियामतुल्लाह फरीदी ने थामा जदयू का दामन, बदलेंगे सियासी समीकरण

Buxar News: बक्सर जिले की राजनीति में मंगलवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने स्थानीय सियासत को नई दिशा दे दी है। बक्सर नगर परिषद के चेयरमैन प्रतिनिधि नियामतुल्लाह फरीदी ने औपचारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण (Niyamatullah Faridi Joins JDU) कर ली।

पटना में हुआ राजनीतिक घटनाक्रम

पटना में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सिर्फ नियामतुल्लाह फरीदी ही नहीं, बल्कि राजपुर के हरेराम पासवान और पांडेय पट्टी के चंदेश्वर पांडेय ने भी जदयू की सदस्यता लेकर पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया। गौरतलब है कि ये दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी पकड़ रखते हैं, ऐसे में इनके शामिल होने से जदयू को जमीनी स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सदस्यता पटना में जहानाबाद के पूर्व सांसद और जदयू के वरिष्ठ नेता अरुण कुमार द्वारा दिलाई गई।

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नीतीश कुमार के नेतृत्व से प्रभावित फरीदी

सदस्यता ग्रहण करने के बाद नियामतुल्लाह फरीदी ने साफ शब्दों में कहा कि,

वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और जदयू की विकासोन्मुख नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए हैं। जदयू ने बिहार में सुशासन, विकास और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है, और यही कारण है कि वे इस राजनीतिक यात्रा का हिस्सा बने हैं।

फरीदी ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए धरातल पर सक्रिय रूप से काम करेंगे। हालाकी राजनीति में बयान आम बात है, लेकिन उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त बनाने की बात कही, जिसे राजनीतिक विश्लेषक गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं।

बक्सर की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नियामतुल्लाह फरीदी के जदयू में शामिल होने से बक्सर नगर परिषद क्षेत्र समेत आसपास के इलाकों में पार्टी की स्थिति और मजबूत होगी। गौरतलब है कि नगर परिषद प्रतिनिधि होने के नाते फरीदी की स्थानीय जनता में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका जदयू में आना विपक्षी दलों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

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हालाकी अभी किसी चुनाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह राजनीतिक घटनाक्रम आगामी नगर निकाय और विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। जदयू लगातार अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी है, और फरीदी जैसे नेताओं का पार्टी में शामिल होना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि,

बक्सर जैसे जिलों में स्थानीय नेताओं की भूमिका बेहद अहम होती है। फरीदी के शामिल होने से जदयू को न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती मिलेगी, बल्कि जनता के बीच पार्टी की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार की राजनीति में लगातार नए समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

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