समुद्र के नीचे छिपा भारत का नया परमाणु ब्रह्मास्त्र! INS अरिधमन की एंट्री से बढ़ी दुश्मनों की टेंशन

समुद्र के नीचे छिपा भारत का नया परमाणु ब्रह्मास्त्र! INS अरिधमन की एंट्री से बढ़ी दुश्मनों की टेंशन

भारत ने बिना ज्यादा शोर किए अपनी परमाणु ताकत में बड़ा इजाफा कर लिया है। भारतीय नौसेना में शामिल हुई INS Aridhaman अब देश की तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी बन गई है। माना जा रहा है कि यह पनडुब्बी समुद्र के भीतर लंबे समय तक छिपकर दुश्मनों पर जवाबी हमला करने में सक्षम है। खास बात यह है कि इसकी एंट्री से भारत की रणनीतिक ताकत और परमाणु प्रतिरोध क्षमता दोनों पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई हैं।

INS Aridhaman भारत के लिए क्यों है बेहद खास?

INS Aridhaman भारत की तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है और यही इसे बेहद खास बनाता है। बता दें कि इस पनडुब्बी के शामिल होने से (INS Aridhaman Commissioned) भारत उन ताकतवर देशों के और करीब पहुंच गया है जो लगातार समुद्र में परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां तैनात रखने की क्षमता रखते हैं।

इस तरह की पनडुब्बियों का मकसद सीधे युद्ध लड़ना नहीं होता, बल्कि समुद्र की गहराई में छिपकर दुश्मन को जवाब देने की तैयारी रखना होता है। क्योंकि भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, इसलिए INS Aridhaman जैसी पनडुब्बियां यह सुनिश्चित करती हैं कि अगर भारत पर कभी परमाणु हमला होता है तो देश मजबूत जवाब देने में सक्षम रहे। यही वजह है कि इसे भारत की सुरक्षा रणनीति का बेहद अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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पारंपरिक पनडुब्बी से कितनी अलग है INS Aridhaman?

जहां आम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने और इंजन चलाने के लिए समय-समय पर पानी की सतह के करीब आना पड़ता है, वहीं इसी दौरान उनके दुश्मन की नजर में आने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि INS Aridhaman जैसी परमाणु पनडुब्बी को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि इसमें लगा मिनी न्यूक्लियर रिएक्टर इसे लंबे समय तक लगातार पानी के भीतर छिपे रहने की ताकत देता है।

यही वजह है कि इसे ढूंढ पाना दुश्मनों के लिए बेहद मुश्किल होता है। बता दें कि ऐसी पनडुब्बियां भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को मजबूत करती हैं, यानी अगर दुश्मन पहले हमला भी कर दे तो भारत उसके बाद भी जोरदार जवाब देने में सक्षम रहता है।

INS Aridhaman से भारत की रणनीतिक ताकत कैसे बढ़ेगी?

INS Aridhaman के भारतीय नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री परमाणु शक्ति को बड़ा रणनीतिक फायदा मिलेगा। बता दें कि भारत के पास पहले से INS Arihant और INS Arighaat जैसी दो परमाणु पनडुब्बियां हैं, और अब तीसरी SSBN जुड़ने से भारत लगातार समुद्र में कम से कम एक परमाणु पनडुब्बी तैनात रखने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकता है।

हालांकि ऐसी पनडुब्बियों को हर समय ऑपरेशन में रखना आसान नहीं होता, क्योंकि एक पनडुब्बी गश्त पर रहती है, दूसरी मिशन की तैयारी करती है और तीसरी रखरखाव में होती है। ऐसे में तीन पनडुब्बियों का होना भारत के लिए बड़ा सामरिक लाभ माना जा रहा है।

INS Aridhaman अरिहन्त क्लास की अब तक की सबसे शक्तिशाली पनडुब्बी बताई जा रही है, जिसका वजन करीब 7,000 टन है और यह पहले के मुकाबले ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने की क्षमता रखती है।

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भारत की अगली तैयारी क्या है?

INS Aridhaman के बाद भारत अब अपनी समुद्री परमाणु ताकत को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। बता दें कि देश अगली पीढ़ी की S5 क्लास परमाणु पनडुब्बियां विकसित कर रहा है, जो मौजूदा पनडुब्बियों से ज्यादा बड़ी और ज्यादा घातक होंगी तथा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें ले जाने में सक्षम रहेंगी।

वहीं, भारत पूर्वी तट पर INS Varsha नाम का एक खास सबमरीन बेस भी तैयार कर रहा है, जहां इन परमाणु पनडुब्बियों को सुरक्षित रखा जाएगा। रक्षा जानकारों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की समुद्री परमाणु क्षमता एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी।

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