7 साल बाद भारत ने खोला ईरानी तेल का रास्ता, होर्मुज संकट के बीच 4 टैंकरों को मिली एंट्री

Iranian Oil Tanker Sikka Port Entry
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज संकट (Hormuz Crisis) के बीच भारत के ऊर्जा सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। गुजरात के सिक्का पोर्ट पर 4 ईरानी तेल टैंकरो को विशेष अनुमति देकर प्रवेश दिया गया है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत 2019 के बाद एक बार फिर ईरानी तेल की ओर कदम बढ़ा रहा है? यह फैसला ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल संकट के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत ने 4 ईरानी तेल टैंकरों को क्यों दी अचानक मंजूरी?

भारत के शिपिंग मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुरोध पर चार अमेरिकी प्रतिबंधित तेल जहाजों को गुजरात के सिक्का पोर्ट (Iranian Oil Tanker Sikka Port Entry) पर डॉक करने की विशेष अनुमति दी है। इन टैंकरों के नाम काविज, लेनोर, फेलिसिटी और हेदी बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये सभी जहाज ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचे हैं, जबकि आम तौर पर ऐसे जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर एंट्री नहीं मिलती, लेकिन इस बार सरकार ने विशेष छूट दी है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज संकट की वजह से दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है, ऐसे में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह एक बार का फैसला लिया ताकि देश में तेल की सप्लाई प्रभावित न हो और जरूरत के समय कोई कमी न आए।

2019 के बाद पहली बार क्यों बदला रुख?

बता दें कि भारत ने मई 2019 में अमेरिकी दबाव के बाद ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था, क्योंकि उस समय अमेरिका ने कई देशों को ईरानी कच्चा तेल खरीदने से रोक दिया था। हालांकि अब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने और आपूर्ति पर दबाव बनने के कारण अमेरिका ने समुद्री रास्ते से ईरानी तेल खरीद पर अस्थायी राहत दी है, जो 19 अप्रैल तक लागू बताई जा रही है। इसी राहत का फायदा उठाते हुए भारत ने यह कदम उठाया है।

“शैडो फ्लीट” होने से क्यों खास है मामला?

गौरतलब है कि जिन चार टैंकरों को अनुमति मिली है वे तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माने जाते हैं। ये जहाज 20 साल से ज्यादा पुराने हैं और इनके पास अंतरराष्ट्रीय बीमा भी नहीं है। यही वजह है कि भारतीय नियमों के तहत ऐसे जहाजों को सामान्य तौर पर बंदरगाह पर प्रवेश नहीं मिलता, इसलिए रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को इनके लिए विशेष सरकारी मंजूरी लेनी पड़ी।

क्या रिलायंस इस ईरानी तेल का इस्तेमाल करेगी?

हालांकि टैंकरों को सिक्का पोर्ट पर एंट्री मिल चुकी है, लेकिन अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि रिलायंस इस ईरानी कच्चा तेल को रिफाइन करेगी या नहीं। कंपनी फिलहाल यह सुनिश्चित करने में लगी है कि पूरा लेनदेन भारतीय नियमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में रहे। गौरतलब है कि अगर रिलायंस इस तेल को इस्तेमाल करती है, तो इसे भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

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