अब मोबाइल टावर की जरूरत होगी खत्म, दुनिया के 46% स्मार्टफोन में आएगी सैटेलाइट कॉलिंग सुविधा

Satellite Calling Feature: 2030 तक 46% Smartphones में आएगा Sky Network
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मोबाइल में नेटवर्क नहीं आता तो अब चिंता खत्म हो सकती है। आने वाले समय में आपका फोन सीधे आसमान में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होगा। नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है कि 2030 तक दुनिया के 46% स्मार्टफोन में सैटेलाइट कॉलिंग तकनीक (Satellite Calling Feature) मिल सकता है। यानी जंगल, पहाड़ या गांव जैसे इलाकों में भी कॉल और मैसेज आसान हो सकते हैं। आखिर कौन सी कंपनियां इस रेस में सबसे आगे हैं, आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट।

2030 तक हर दूसरे फोन में आ सकता है सैटेलाइट फीचर

स्मार्टफोन बाजार अब तेजी से सैटेलाइट तकनीक की ओर बढ़ रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक दुनिया में बिकने वाले करीब 46 प्रतिशत स्मार्टफोन ऐसे हो सकते हैं जो जरूरत पड़ने पर सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होंगे। आसान शब्दों में कहें तो जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा, वहां भी फोन काम कर सकेगा।

हालांकि शुरुआत में यह सुविधा कुछ कंपनियों के सीमित नेटवर्क तक ही रहेगी, क्योंकि अभी एक समान ग्लोबल सिस्टम तैयार होने में समय लगेगा। 2022 में इस फीचर की शुरुआत तेज हुई थी, 2026 तक यह महंगे फोन में सीमित रहेगी, जबकि 2030 तक यह आम होती नजर आ सकती है।

Apple ने शुरू की रेस, अब Samsung और Xiaomi भी मैदान में

सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाले स्मार्टफोन की दौड़ अब तेजी पकड़ चुकी है। इस तकनीक को लोगों तक पहुंचाने का बड़ा श्रेय Apple को दिया जाता है, जिसने साल 2022 में iPhone 14 के साथ Satellite SOS फीचर लॉन्च कर सबका ध्यान खींचा था। इसके लिए कंपनी ने Globalstar के साथ साझेदारी की थी।

इसके बाद 2023 में Huawei ने भी अपने फोन में यह सुविधा दी। अब Samsung, Google, Xiaomi, OPPO और Vivo समेत 10 से ज्यादा बड़े ब्रांड चुनिंदा स्मार्टफोन मॉडल्स में सैटेलाइट फीचर देने लगे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इस समय Apple इस बाजार में सबसे मजबूत खिलाड़ी है, जबकि Android फोन में Samsung सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं कई कंपनियां अपने निजी सैटेलाइट नेटवर्क पर काम कर रही हैं, जबकि कुछ ब्रांड साझा तकनीक अपनाने की तैयारी में जुटे हैं।

अभी कीन फोन में मिल रही सैटेलाइट कॉलिंग सुविधा?

फिलहाल सैटेलाइट कॉलिंग और सैटेलाइट मैसेजिंग फीचर ज्यादातर महंगे स्मार्टफोन में ही देखने को मिल रहा है, क्योंकि अभी इसका उपयोग मुख्य रूप से इमरजेंसी एसओएस मैसेज भेजने तक सीमित है। यानी आम लोगों के रोजमर्रा इस्तेमाल के लिए यह सुविधा अभी पूरी तरह तैयार नहीं मानी जा रही।

जानकारों का कहना है कि,

जब इसमें सामान्य कॉलिंग, इंटरनेट और आसान कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं जुड़ेंगी, तब इसकी मांग तेजी से बढ़ सकती है। हालांकि आने वाले समय में 3जीपीपी रिलीज 18 और रिलीज 19 के बाद यह तकनीक मिड रेंज और बजट फोन तक भी पहुंच सकती है।

बहरहाल अगर ऐसा हुआ तो गांव, पहाड़, जंगल और दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा, जहां आज भी नेटवर्क पहुंचना मुश्किल है।

सैटेलाइट नेटवर्क रेस में अमेरिका सबसे आगे

फिलहाल सैटेलाइट कनेक्टिविटी की दौड़ में अमेरिका सबसे आगे दिखाई दे रहा है। वहां टी-मोबाइल ने स्पेसएक्स के साथ और एटी एंड टी ने एएसटी मोबाइल के साथ बड़े समझौते किए हैं, ताकि मोबाइल फोन तक सीधे सैटेलाइट नेटवर्क पहुंचाया जा सके।

वहीं यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजार अभी इस तकनीक को तेजी से शुरू करने की जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। हालांकि जैसे-जैसे लोगों की मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे दूसरे देशों में भी सैटेलाइट नेटवर्क सेवा शुरू होने की रफ्तार तेज हो सकती है।

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