अब हर महीने भारत में बनेंगे नए यूनिकॉर्न, सरकार ने ₹10,000 करोड़ का नया फंड ऑफ फंड्स किया लॉन्च

अब हर महीने भारत में बनेंगे नए यूनिकॉर्न, सरकार ने ₹10,000 करोड़ का नया फंड ऑफ फंड्स किया लॉन्च

Startup Fund of Funds 2.0: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। ₹10,000 करोड़ के स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी मिलते ही फाउंडर्स और इन्वेस्टर्स की नजरें इस पर टिक गई हैं। बता दें कि यह फंड सिर्फ पैसे की घोषणा नहीं है, बल्कि deep tech, मैन्युफैक्चरिंग और छोटे शहरों के स्टार्टअप्स के लिए नए मौके खोल सकता है। खास बात है कि मौजूदा सतर्क फंडिंग माहौल में यह कदम भारतीय स्टार्टअप्स को लंबी रेस का खिलाड़ी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Startup Fund of Funds 2.0 क्या है?

स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स 2.0 (Startup Fund of Funds 2.0) को लेकर काफी चर्चा है, लेकिन बता दें कि यह ₹10,000 करोड़ सीधे नए उद्यमों को नहीं दिए जाएंगे। सरकार यह रकम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों में लगाएगी और यही कोष आगे चलकर अलग-अलग नए उद्यमों में पैसा लगाएंगे। मतलब साफ है कि किस उद्यम को निवेश मिलेगा, यह फैसला कोष प्रबंधक करेंगे, सरकार नहीं।

ये भी पढ़ें: अब अपने रोज़मर्रा के खर्चों से करें कमाई, RuPay क्रेडिट कार्ड से पेमेंट पर होगा मोटा फायदा, जानें तरीका

यह तरीका नया नहीं है, इससे पहले भी यही मॉडल अपनाया गया था और इसे बाजार के लिहाज से ज्यादा व्यावहारिक माना गया। गौरतलब है कि साल 2016 में शुरू हुए पहले फंड ऑफ फंड्स के तहत भी ₹10,000 करोड़ का प्रावधान था, जिसमें 145 वैकल्पिक निवेश कोषों को सहयोग मिला और उन्होंने मिलकर 1,370 से ज्यादा नए उद्यमों में करीब ₹25,500 करोड़ का निवेश किया।

वित्तीय प्रौद्योगिकी, कृषि प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोट तकनीक और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों को इसका सीधा फायदा मिला और सरकार का दावा है कि इससे निजी पूंजी भी शुरुआती दौर में आकर्षित हुई।

डीप टेक पर क्यों है इस बार ज्यादा जोर?

इस बार फंड ऑफ फंड्स 2.0 में सबसे ज्यादा ध्यान डीप टेक, उन्नत विनिर्माण और तकनीक आधारित नवाचार पर दिया जा रहा है। दरअसल ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां जोखिम ज्यादा होता है और मुनाफा आने में समय लगता है। यही वजह है कि निजी निवेशक अक्सर सोच-समझकर कदम रखते हैं या दूरी बना लेते हैं।

नई योजना ऐसे स्टार्टअप्स के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी का सहारा बनेगी, ताकि उन्हें लंबे समय तक काम करने और बड़े स्तर पर आगे बढ़ने का मौका मिल सके। बता दें कि सरकार का मकसद सिर्फ जल्दी फायदा कमाना नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत तकनीकी कंपनियां तैयार करना है।

ये भी पढ़ें: अब बिना किसी गारंटी के मिलेगा 2 लाख का लोन, RBI ने किया फैसला

यही वजह है कि हजारों स्टार्टअप बीच रास्ते में रुक गए

बता दें कि भारत में स्टार्टअप्स की रफ्तार बीते कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ी है। साल 2016 में जहां इनकी संख्या 500 से भी कम थी, वहीं आज डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की गिनती 2 लाख के पार पहुंच चुकी है और 2025 में सबसे ज़्यादा नए स्टार्टअप्स दर्ज हुए हैं। हालांकि, जैसे-जैसे ये स्टार्टअप शुरुआती दौर से आगे बढ़ते हैं, वैसे-वैसे धैर्यशील पूंजी की कमी साफ दिखने लगती है।

बीज चरण के बाद विस्तार के लिए लंबी अवधि का निवेश मिलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यहां जोखिम ज़्यादा और मुनाफा देर से आता है। गौरतलब है कि फंड ऑफ फंड्स 2.0 इसी खाली जगह को भरने की कोशिश है। खास बात यह भी है कि इसका फायदा सिर्फ स्टार्टअप्स को नहीं, बल्कि देसी वेंचर कैपिटल फंड्स को भी मिलेगा, ताकि भारतीय फंड्स विदेशी पूंजी पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहें।

अगर यह मॉडल सही तरह से चला, तो सार्वजनिक धन के जरिए निजी निवेश बढ़ेगा और एक रुपये से कई रुपये का निवेश पूरे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में देखने को मिल सकता है।

छोटे शहरों के स्टार्टअप्स के लिए कितनी बड़ी है यह पहल?

बता दें कि यह योजना सिर्फ बेंगलुरु या गुरुग्राम जैसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों तक सीमित नहीं रखी गई है। सरकार का साफ संकेत है कि फंडिंग का फायदा टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी पहुंचे, जहां टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन नेटवर्क और पूंजी तक पहुंच अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ये भी पढ़ें: 50,000 से अधिक गांवों में संपत्ति कार्ड वितरित करेंगे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, लोन लेना हो या जमीन की खरीद-बिक्री, सब होगा आसान

अगर वैकल्पिक निवेश फंड्स ने इन इलाकों पर सही तरीके से ध्यान दिया, तो देश में एक नया स्टार्टअप नक्शा उभर सकता है। गौरतलब है कि फंड ऑफ फंड्स 2.0 को सरकार सिर्फ निवेश की योजना नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती और भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।

डीप टेक और नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के जरिए भारत सिर्फ सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि डिजाइन और प्रोडक्ट बनाने वाला देश बनना चाहता है। कुल मिलाकर, अब सवाल यह नहीं है कि पैसा आएगा या नहीं, सवाल यह है कि क्या भारत इस मौके से अगली पीढ़ी की टेक कंपनियां खड़ी कर पाएगा।

Jai Jagdamba News Whatsapp