वैज्ञानिकों ने किया 2025 का सबसे बड़ा खोज, धरती से थोड़ी ही दूर पर मिला 4 गुना बडा ‘दूसरा पृथ्वी’
Super Earth GJ 251C: वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक बेहद खास खोज की है जिसे साल 2025 की सबसे बड़ी खोज कहा जा रहा है। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने धरती से करीब 20 Light Year की दूरी पर एक धरती जैसी लेकिन चार गुना बड़ी नई दुनिया खोजी है। इस ग्रह को सुपर अर्थ GJ 251C नाम दिया गया है, जो की एक धुंधले लाल बौने तारे के चारों ओर घूम रहा है।
खास बात ये है कि यह अपने तारे से बिल्कुल सही दूरी पर मौजूद है, जिसे वैज्ञानिक Goldilocks Zone कहते हैं यानी ऐसी जगह जहां पानी और जीवन दोनों की संभावना हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने कैसे खोजा Super Earth GJ 251C ग्रह?
लगातार 20 सालों की मेहनत और गहरी निगरानी के बाद वैज्ञानिकों ने आखिरकार Super Earth GJ 251C नामक ग्रह की खोज की है। यह खोज “द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल” में प्रकाशित की गई है। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोल शास्त्री प्रोफेसर सुव्रत महादेवन के मुताबिक, इस तरह की खोजें धरती के बाहर जीवन तलाशने की दिशा में एक नई उम्मीद जगाती हैं।
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इस रिसर्च में एक खास उपकरण Habitable-Zone Planet Finder (HPF) का इस्तेमाल किया गया, जिसे पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है। यह उपकरण किसी ग्रह को सीधे नहीं देखता, बल्कि जिस तारे के चारों ओर ग्रह घूम रहा होता है, उसमें आने वाले गुरुत्वाकर्षण के हल्के झटके या “डगमगाहट” को पकड़ता है।
जब वैज्ञानिकों ने देखा कि हर 54 दिनों में तारे की गति में नियमित बदलाव हो रहा है, तो उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उसके पास एक नया ग्रह मौजूद है और वही है Super Earth GJ 251C।
क्या GJ 251C ग्रह पर जीवन संभव है?
हालाकि, अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि वहां जीवन है या नहीं, लेकिन इसकी स्थिति और दूरी ऐसी है कि वहां तरल पानी और उपयुक्त तापमान होने की पूरी संभावना है। भविष्य में वैज्ञानिक GJ 251C के वायुमंडल का अध्ययन करेंगे ताकि यह पता चल सके कि वहां ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य जीवन-संबंधी तत्व हैं या नहीं।
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अगर ऐसा होता है, तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोजों में से एक मानी जाएगी क्योंकि यह साबित करेगा कि हमारी धरती ब्रह्मांड में अकेली नहीं है।
वैज्ञानिकों की अगली योजना
वैज्ञानिक अब इस ग्रह को और विस्तार से देखने के लिए जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और अन्य उन्नत दूरबीनों की मदद लेने की तैयारी में हैं।
खास तौर पर यह समझने के लिए कि वहां की सतह कैसी है, वहां वातावरण है या नहीं, और क्या यह ग्रह भविष्य में “मानव जीवन के लिए दूसरा घर” बन सकता है।
