तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग से सवाल, ज्ञानेश कुमार के पुराने फैसलों पर क्यों उठाई उंगली?

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के हालिया फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर पहले के फैसले सही थे, तो अब उनमें बदलाव क्यों किए जा रहे हैं? SIR को लेकर जारी विवाद के बीच उनके इस बयान से सियासी बहस फिर तेज हो गई है।
ज्ञानेश कुमार पर तेजस्वी के सवाल
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आयोग के पुराने फैसलों और अब लिए जा रहे फैसलों के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए। तेजस्वी का आरोप है कि आयोग दबाव में आकर अपने पुराने नियमों और फैसलों से पीछे हट रहा है।
तेजस्वी यादव ने सवाल किया कि चुनावों में कथित धांधली और बेईमानी किसके कहने पर हुई? उन्होंने कहा कि,
अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले सही थे, तो अब अपने फैसलों में बदलाव क्यों कर रहे हैं। कोई व्यक्ति एक ही मामले में पहले और अब दोनों समय सही नहीं हो सकता, अगर उसके फैसलों में विरोधाभास हो।
हालांकि, ये आरोप तेजस्वी यादव और विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए हैं। उनके बयान में चुनाव आयोग के फैसलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया गया है। इस मुद्दे ने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
“Jo Qurbani Deni Hogi, Sab Milkar Denge. Tejashwi Yadav Election Commission Controversy” 🔥🔥
-Tejashwi Yadav https://t.co/dcJhQZoH6b
— Krishna Yadav (@Control_Krishna) October 13, 2026
SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने को लेकर अनियमितताएं हुई हैं। विपक्ष का कहना है कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को अपनी प्रक्रिया और फैसलों पर जवाब देना चाहिए।
इसी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। इस मुद्दे पर बिहार की राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
सोमवार को नई दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इस मार्च में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष की ओर से इस विरोध के जरिए चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया।
तेजस्वी यादव का ताजा बयान भी इसी विरोध का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है।
बिहार से शुरू हुई SIR की लड़ाई

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि SIR के खिलाफ आवाज सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार से उठाई थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताती रही है। अब दूसरे विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
तेजस्वी ने पहले भी आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। उनका दावा है कि चुनावों में कथित वोट चोरी और अनियमितताओं से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात भी कही।
आरजेडी नेता ने कहा कि जब लोकतंत्र पर हमले होने का आरोप लगाया जा रहा है, तब विपक्ष चुप नहीं बैठ सकता। उनके अनुसार, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विपक्ष और तेजस्वी यादव की आपत्तियां राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। एक तरफ विपक्ष SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पुराने और नए फैसलों के बीच कथित विरोधाभास को मुद्दा बनाया है।
अब इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। फिलहाल तेजस्वी यादव और आरजेडी ने साफ कर दिया है कि वे SIR और निष्पक्ष चुनाव के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेंगे।

