ईरान के गुप्त ठिकानों पर उतर सकती है दुनिया की सबसे खतरनाक फोर्स, जानिए अमेरिका-इजरायल का खुफिया प्लान

ईरान के गुप्त ठिकानों पर उतर सकती है दुनिया की सबसे खतरनाक फोर्स, जानिए अमेरिका-इजरायल का खुफिया प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ईरान के खिलाफ सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहते। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के गुप्त परमाणु ठिकानों पर स्पेशल फोर्स भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस मिशन में वही एलीट यूनिट शामिल हो सकती है जिसने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराने वाले ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी।

ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर जमीनी ऑपरेशन की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल अब ईरान के गुप्त परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन ऑपरेशनों (Special Forces Operation in Iran) का मकसद ईरान के पहाड़ों के अंदर बने न्यूक्लियर बंकरों को नुकसान पहुंचाना और वहां की गतिविधियों को रोकना हो सकता है।

हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खुफिया हलकों में इस तरह की तैयारी की चर्चा तेज है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताता रहा है।

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बताया जा रहा है कि इस मिशन में अमेरिका की डेल्टा फोर्स और इजरायल की सायरेट मटकल यूनिट को शामिल किया जा सकता है। ये दोनों यूनिट्स दुनिया की सबसे खतरनाक और गोपनीय स्पेशल फोर्स मानी जाती हैं।

कितनी खतरनाक है अमेरिका की डेल्टा फोर्स?

अमेरिका की एलीट यूनिट डेल्टा फोर्स (Delta Force) को दुनिया की सबसे ताकतवर काउंटर-टेररिज्म यूनिट्स में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1977 में कर्नल Charles Beckwith ने की थी।यह यूनिट अमेरिकी सेना के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के तहत काम करती है। इसका मुख्य काम दुश्मन के इलाके में घुसकर बड़े टारगेट को खत्म करना, बंधकों को बचाना और गुप्त मिशन को अंजाम देना होता है।

यह यूनिट इतनी गोपनीय मानी जाती है कि इसके सैनिक अपना चेहरा या पहचान सार्वजनिक नहीं करते। इस यूनिट को केवल सबसे कठिन और संवेदनशील मिशन दिए जाते हैं।

2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में हुए Operation Neptune Spear में इसी तरह की स्पेशल फोर्स टीम ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। माना जा रहा है कि अगर ईरान में जमीनी ऑपरेशन होता है तो डेल्टा फोर्स की भूमिका बेहद अहम हो सकती है।

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कैसे काम करती है इजरायल की स्पेशल फोर्स सायरेट मटकल?

इजरायल की बेहद खतरनाक कमांडो यूनिट सायरेट मटकल (Sayeret Matkal) को दुनिया की सबसे ताकतवर गुप्त सैन्य टुकड़ियों में गिना जाता है। यह यूनिट इजरायल की सेना इस्राइल डिफेन्स फोर्स के अधीन काम करती है और इसकी स्थापना 1957 में हुई थी। इसका मुख्य काम दुश्मन के इलाके में चुपचाप घुसकर जानकारी जुटाना और बड़े लक्ष्यों पर सटीक कार्रवाई करना होता है।

यह यूनिट आमतौर पर बहुत छोटी टुकड़ी में काम करती है, जिसमें करीब 8 से 12 कमांडो शामिल होते हैं, लेकिन इनकी ट्रेनिंग बेहद कठिन और खतरनाक मिशनों के लिए होती है। साल 1976 में युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे पर हुए मशहूर Operation Entebbe में इसी यूनिट ने बंधकों को सुरक्षित छुड़ाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था।

इन स्पेशल फोर्स के हथियार और तकनीक

इन दोनों यूनिट्स के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार होते हैं। मिशन के दौरान कमांडो आमतौर पर HK416 या M4A1 जैसी कार्बाइन राइफल, ग्लॉक पिस्तौल और स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल करते हैं।

इसके अलावा नाइट विजन गॉगल्स, थर्मल कैमरे, ड्रोन और अत्याधुनिक कम्युनिकेशन डिवाइस भी इनके पास होते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन यूनिट्स के पास ऐसे गोपनीय उपकरण भी होते हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती।

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ऑपरेशन के दौरान कैसी होती है टैक्टिक्स

इन स्पेशल फोर्स की रणनीति बेहद सटीक और तेज होती है। आमतौर पर ये छोटी टीम बनाकर काम करती हैं। पहले ड्रोन और खुफिया नेटवर्क से जानकारी जुटाई जाती है, फिर अचानक हमला किया जाता है। कमांडो अक्सर रात के समय ऑपरेशन करते हैं ताकि दुश्मन को भनक न लगे। मिशन पूरा होते ही टीम तुरंत हेलीकॉप्टर या दूसरे साधनों से वहां से निकल जाती है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल वास्तव में ईरान में ऐसा ऑपरेशन करेंगे या नहीं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो यह पूरे क्षेत्र की स्थिति बदल सकता है।

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