क्या तेल की बढ़ती कीमतों पर लगेगा लगाम? IEA ने 182 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का दिया प्रस्ताव

IEA Oil Reserve Release amid Middle East crisis
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दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच एक बड़ा कदम सामने आया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने भंडार से बड़ी मात्रा में तेल जारी करने का प्रस्ताव दिया है। बताया जा रहा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा तेल भंडार रिलीज़ हो सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में राहत मिलने की उम्मीद है।

IEA ने 182 मिलियन बैरल तेल रिलीज़ करने का दिया प्रस्ताव

मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में दबाव बढ़ गया है। इसी को देखते हुए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के साथ एक आपात बैठक में बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत लगभग 182 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी किया जा सकता है। इससे पहले साल 2022 में भी इसी मात्रा में तेल दो चरणों में जारी किया गया था, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था।

हालांकि इस बार यह मात्रा उससे भी अधिक हो सकती है। जानकारी के मुताबिक IEA के 32 सदस्य देशों के ऊर्जा अधिकारियों के बीच इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। यदि किसी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई, तो इसे लागू किया जा सकता है। लेकिन अगर एक भी देश विरोध करता है तो फैसला टल सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट से तेल सप्लाई पर असर

इस कदम (IEA Oil Reserve Release) के पीछे सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुआ संकट है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। बता दें कि दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा हर दिन इसी रास्ते से गुजरता है।

हाल के दिनों में ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर हमले की आशंका के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इसके कारण वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि IEA तेल भंडार जारी कर बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

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युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से तेल बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 28 फरवरी के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया। एक समय तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गई थीं।

हालांकि इस सप्ताह कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिली और यह 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। डीजल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल के मुताबिक,

सदस्य देशों के पास लगभग 1.2 बिलियन बैरल सार्वजनिक तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा करीब 600 मिलियन बैरल वाणिज्यिक भंडार भी उपलब्ध हैं। इन भंडारों से खाड़ी क्षेत्र से आने वाली सप्लाई में कमी होने पर करीब 124 दिनों तक जरूरत पूरी की जा सकती है।

बता दें कि IEA की स्थापना साल 1974 में अरब तेल प्रतिबंध के बाद की गई थी। जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखना और संकट के समय तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

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इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है जब वैश्विक संकट के दौरान तेल भंडार जारी कर बाजार को संतुलित करने की कोशिश की गई। अब एक बार फिर दुनिया की नजर इस फैसले पर टिकी है कि क्या IEA का यह कदम तेल की कीमतों को नियंत्रित कर पाएगा।

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