अब देश में खत्म हो सकती है गैस सिलेंडर की टेंशन, पुणे में शुरू हुआ बड़ा प्रयोग
ONGC CSIR-NCL DME Pilot Project: भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया प्रयोग शुरू होने जा रहा है। ONGC और CSIR-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी मिलकर ऐसा ईंधन तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो आने वाले समय में LPG का विकल्प बन सकता है। यह प्रोजेक्ट खास तौर पर औद्योगिक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है और इसकी शुरुआत पुणे में होगी।
DME पायलट प्रोजेक्ट क्या है?
ONGC और CSIR-NCL मिलकर एक नया औद्योगिक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें डाइमेथिल ईथर (DME) नाम के ईंधन पर काम होगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद यह पता लगाना है कि क्या DME को एलपीजी (LPG) की जगह बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
बता दें कि DME एक ऐसा स्वच्छ जलने वाला ईंधन है जिसे खासकर फैक्ट्रियों में हीटिंग और प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे भारत में ही विकसित तकनीक से तैयार किया जा रहा है, जिसे CSIR-NCL पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाया है।
हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसका असली लक्ष्य देश को ऊर्जा के मामले में मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि आने वाले समय में विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके।
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DME Pilot Project का रोडमैप और लक्ष्य
इस पायलट प्रोजेक्ट को तीन साल की अवधि के लिए तैयार किया गया है, जिसमें पहले साल में मुख्य काम प्लांट को तैयार और स्थापित करने पर रहेगा, जबकि इसके बाद के सालों में उत्पादन और तकनीकी परीक्षण को आगे बढ़ाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की शुरुआती क्षमता करीब 2.5 टन रखी गई है।
इसमें पूरी संचालन लागत की जिम्मेदारी ONGC उठाएगा, जबकि रिसर्च और तकनीकी काम CSIR-NCL की टीम देखेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का मकसद यह समझना है कि DME को उद्योगों में कितनी आसानी से और कितनी कम लागत में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि आगे चलकर इसे बड़े स्तर पर अपनाने पर फैसला लिया जा सके।
परियोजना की मुख्य जानकारी
| विषय | विवरण |
|---|---|
| प्रोजेक्ट नाम | DME (Dimethyl Ether) पायलट प्रोजेक्ट |
| स्थान | पुणे |
| अवधि | 3 वर्ष |
| क्षमता | लगभग 2.5 टन |
| प्रमुख संस्थान | ONGC और CSIR-NCL |
| उपयोग | औद्योगिक LPG विकल्प |
भारत की ऊर्जा रणनीति और DME की भूमिका
भारत इस समय ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। खासकर LPG की आपूर्ति पर वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में सरकार घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन पर जोर दे रही है।
बता दें कि हाल ही में सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रोपेन, ब्यूटेन और प्रोपलीन जैसे संसाधनों को LPG उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौजूदा संसाधनों से उत्पादन को सीमित रूप से ही बढ़ाया जा सकता है। इसलिए नए विकल्पों की जरूरत और बढ़ जाती है।
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DME क्यों बन सकता है भविष्य का ईंधन?
डीएमई यानी डाइमेथाइल ईथर को भविष्य का एक साफ और बेहतर ईंधन माना जा रहा है क्योंकि इसके जलने पर बहुत कम प्रदूषण होता है और यह पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाता है। खास बात यह है कि यह एलपीजी की तरह ही कई औद्योगिक कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे फैक्ट्रियों और उद्योगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है।
इसे देश में ही CSIR-NCL ने विकसित किया है, जिससे भारत को विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। ओएनजीसी और एनसीएल की यह साझेदारी ऊर्जा क्षेत्र में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।
अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है तो आने वाले समय में इसका उत्पादन 100 से 500 टन प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर ईंधन की उपलब्धता आसान हो जाएगी और भारत ऊर्जा के मामले में और मजबूत स्थिति में आ सकता है।
