₹23,437 करोड़ की बड़ी रेल योजना मंजूर, 6 राज्यों में बदलेगी तस्वीर, जानिए किन इलाकों को होगा सबसे बड़ा फायदा
₹23437 Crore Railway Expansion: देश में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने ₹23,437 करोड़ की लागत वाली 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिससे 6 राज्यों में यात्रा और माल ढुलाई दोनों आसान होने की उम्मीद है। बता दें कि इस योजना से 83 लाख लोगों और हजारों गांवों को फायदा मिल सकता है। आखिर किन राज्यों में बदलेगी रेल व्यवस्था, यही सबसे बड़ा सवाल है।
6 राज्यों में रेलवे विस्तार से बढ़ेगी रफ्तार
केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए तीन बड़े रेल लाइन विस्तार प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिनमें नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रूट शामिल हैं। इन मार्गों पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे ट्रेनों की आवाजाही पहले से ज्यादा तेज और आसान हो सकेगी।
इन योजनाओं से भारतीय रेलवे में करीब 901 किलोमीटर नई क्षमता जुड़ने जा रही है, जिससे मौजूदा ट्रैक पर भीड़ कम होगी और ट्रेनों की देरी में राहत मिलने की उम्मीद है। यह बड़ा रेल प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों को सीधा फायदा पहुंचाएगा।
लाखों लोगों और हजारों गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार की इस बड़ी रेलवे योजना से करीब 4,161 गांवों और लगभग 83 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बता दें कि इसका असर सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और व्यापारिक इलाकों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। रेलवे नेटवर्क मजबूत होने से यात्रा आसान होगी, समय की बचत होगी और कारोबार को नई रफ्तार मिलेगी।
नागदा-मथुरा रूट से उत्तर भारत की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, गुंटकल-वाडी लाइन से दक्षिण भारत में माल ढुलाई तेज होगी, जबकि बुरहवाल-सीतापुर परियोजना से उत्तर प्रदेश में रेल सुविधा मजबूत होने की संभावना है। गौरतलब है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद निर्माण कार्य, परिवहन और स्थानीय बाजारों में रोजगार के नए मौके भी पैदा हो सकते हैं।
पर्यटन, व्यापार और पर्यावरण पर बड़ा असर
सरकार का कहना है कि,
रेलवे क्षमता बढ़ने से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इनमें महाकालेश्वर मंदिर, रणथंभौर नेशनल पार्क, केवलादेव नेशनल पार्क और मथुरा जैसे बड़े धार्मिक व पर्यटन केंद्र शामिल हैं।
बता दें कि इन परियोजनाओं से कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और स्टील जैसे जरूरी सामान की ढुलाई भी तेज होगी। अनुमान है कि हर साल करीब 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है।
सरकार के मुताबिक,
इससे 37 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत हो सकती है और 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह असर करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।
ऐसे में साफ है कि यह फैसला सिर्फ रेलवे विस्तार नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आम लोगों की सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का असर कई राज्यों में दिखाई दे सकता है।
