कौन हैं भारत के नए CDS राजा सुब्रमणि? जानिए तमिलनाडु से देश के सबसे बड़े सैन्य पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी
भारत को नया CDS (Chief of Defence Staff) मिल गया है और इस बार जिम्मेदारी संभाली है अनुभवी सैन्य अधिकारी एनएस राजा सुब्रमणि ने। तमिलनाडु के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े रक्षा पद तक पहुंचने की उनकी कहानी हर युवा को प्रेरित कर सकती है। हालांकि उनका नाम आम लोगों के लिए नया हो सकता है, लेकिन सेना में उनका लंबा अनुभव और कई बड़े सम्मान उन्हें खास बनाते हैं।
तमिलनाडु से सेना के शीर्ष पद तक पहुंचे एनएस राजा सुब्रमणि
एनएस राजा सुब्रमणि का सफर तमिलनाडु से शुरू हुआ, जहां उनका जन्म हुआ और शुरुआती जीवन बीता। माना जाता है कि वे एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, लेकिन बचपन से ही उन्होंने मेहनत, अनुशासन और बड़े लक्ष्य पर ध्यान दिया। यही लगन आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
देश सेवा का सपना लेकर उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी में प्रवेश लिया और फिर देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी से प्रशिक्षण पूरा किया। दिसंबर 1985 में वे भारतीय सेना में शामिल हुए और यहीं से उनकी शानदार सैन्य यात्रा की शुरुआत हुई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साधारण परिवार से निकलकर भी कोई व्यक्ति मेहनत और समर्पण के दम पर देश के सबसे बड़े पदों तक पहुंच सकता है।
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एनएस राजा सुब्रमणि की शिक्षा और ट्रेनिंग का मजबूत रिकॉर्ड
एनएस राजा सुब्रमणि सिर्फ सेना के अनुभवी अधिकारी ही नहीं हैं, बल्कि पढ़ाई और रणनीतिक समझ के मामले में भी काफी मजबूत माने जाते हैं। उन्होंने NDA खडकवासला और IMA देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण लिया। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में भी पढ़ाई की और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से उच्च सैन्य शिक्षा हासिल की।
उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर डिग्री और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल भी किया है। यही मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें आधुनिक युद्ध नीति, सुरक्षा चुनौतियों और बड़े फैसले लेने में सक्षम बनाती है, जिसके चलते उन्हें अब सीडीएस जैसे अहम पद की जिम्मेदारी (NS Raja Subramani New CDS) मिली है।
सेना के कई बड़े पद संभाल चुके हैं NS Raja Subramani
एनएस राजा सुब्रमणि का सैन्य सफर बेहद शानदार रहा है। उन्हें गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट में कमीशन मिला था, जो भारतीय सेना की सम्मानित पैदल सेना इकाइयों में गिनी जाती है। इसके बाद उन्होंने करीब 40 साल तक सेना में सेवा दी और कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। अपने करियर के दौरान उन्होंने ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों, सीमा क्षेत्रों और आतंकवाद प्रभावित जगहों पर काम किया।
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जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी उन्होंने नेतृत्व संभाला, जिससे उन्हें सुरक्षा और सैन्य अभियानों का बड़ा अनुभव मिला। उन्होंने ब्रिगेड, डिविजन और कोर कमांडर जैसे पदों पर काम किया। साथ ही सेंट्रल कमांड के प्रमुख और बाद में सेना के उप प्रमुख भी रहे।
उनकी शानदार सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। अब CDS बनने के बाद वे थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल और भविष्य की रक्षा रणनीति को नई दिशा देंगे।
