रूस देना चाहता था अपना सबसे खतरनाक फाइटर जेट, फिर क्यों पीछे हट गया भारत?
India Rejected Russia MiG-31 Offer: रूस का खतरनाक MiG-31 फाइटर जेट कभी भारत को ऑफर किया गया था, लेकिन भारत ने इसे खरीदने से साफ इनकार कर दिया। सवाल यह है कि दुनिया के सबसे तेज और ताकतवर लड़ाकू विमानों में गिने जाने वाले इस जेट को आखिर क्यों ठुकराया गया? बता दें कि यह विमान हाइपरसोनिक मिसाइल दागने और लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम है। जानिए भारत ने इस डील पर पीछे हटने का फैसला क्यों लिया।
MiG-31 इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
MiG-31 को सोवियत संघ के समय पुराने MiG-25 की जगह तैयार किया गया था और इसका मकसद दुश्मन के विमानों को बहुत दूर से रोकना और खत्म करना था। यह आम लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि बेहद तेज रफ्तार इंटरसेप्टर जेट है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका आधुनिक MiG-31BM मॉडल करीब 400 किलोमीटर दूर तक बड़े हवाई लक्ष्यों को पहचान सकता है।
इसका ताकतवर रडार एक साथ 24 टारगेट पर नजर रख सकता है और उनमें से 8 पर हमला भी कर सकता है। बता दें कि यह R-37M जैसी लंबी दूरी की मिसाइल और किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइल दागने में सक्षम है, जिसकी वजह से इसे कई बार सैटेलाइट किलर विमान भी कहा जाता है।
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MiG-31 में क्या थी सबसे बड़ी खासियत?
रूस ने भारत को मिग-31 लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया था, जिसने उस समय काफी ध्यान खींचा था। इस विमान की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता और एंटी-सैटेलाइट हथियार दागने की संभावना मानी गई थी। साल 1999 में पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने रूस में इस विमान की टेस्ट फ्लाइट भी की थी। उन्होंने बताया था कि,
मिग-31 बेहद तेज रफ्तार से उड़ान भरता है और मैक 2.7 तक की स्पीड हासिल कर सकता है।
खास बात यह रही कि इतनी तेज गति पर भी विमान काफी स्मूद महसूस हुआ, जिससे साफ था कि यह तकनीक और ताकत दोनों मामलों में बेहद दमदार प्लेटफॉर्म था।
भारत ने ताकतवर MiG-31 को क्यों ठुकराया?
MiG-31 बेहद शक्तिशाली लड़ाकू विमान माना जाता था, लेकिन भारत ने सिर्फ ताकत नहीं बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखकर फैसला लिया। इस विमान का डिजाइन पुराना था, रखरखाव मुश्किल और खर्चीला माना जाता था, साथ ही यह कई तरह के मिशन के लिए ज्यादा उपयोगी नहीं था।
बता दें कि MiG-31 खास तौर पर ऊंचाई पर दुश्मन विमानों को रोकने के लिए बनाया गया था, जबकि भारतीय वायुसेना को ऐसा विमान चाहिए था जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों भूमिकाएं निभा सके। इसी वजह से भारत ने Su-30MKI जैसे बहुउपयोगी फाइटर जेट को बेहतर विकल्प माना।
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गौरतलब है कि कम संख्या में MiG-31 लेने से सप्लाई, ट्रेनिंग और रखरखाव का बोझ भी बढ़ता, इसलिए भारत ने अपने स्वदेशी सिस्टम और ग्राउंड बेस्ड एंटी-सैटेलाइट क्षमता पर ज्यादा ध्यान दिया।
आज भी क्यों डर पैदा करता है मिग-31 लड़ाकू विमान?
मिग-31 आज भी दुनिया के सबसे तेज सक्रिय लड़ाकू विमानों में गिना जाता है, यही वजह है कि इसकी चर्चा अब भी होती है। रूस और कजाकिस्तान जैसे देश अभी भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी असली ताकत सिर्फ इसकी रफ्तार नहीं, बल्कि खतरनाक हथियार ले जाने और बहुत दूर तक दुश्मन पर हमला करने की क्षमता है।
यह विमान यह भी दिखाता है कि कोई भी देश सिर्फ ताकत देखकर फाइटर जेट नहीं चुनता, बल्कि उसकी देखभाल, खर्च, युद्ध रणनीति और आने वाले समय की जरूरतों को भी ध्यान में रखता है।
