सावधान! शरीर के इन 5 हिस्सों में दर्द को न करें नजरअंदाज, किडनी खराब होने का हो सकता है संकेत
Kidney Damage Symptoms: क्या आपकी कमर, पेट, पैरों या सीने में होने वाला दर्द सिर्फ सामान्य थकान है या किडनी से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत? अक्सर किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण लोगों की नजर से छूट जाते हैं, जिससे बीमारी धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर के कुछ हिस्सों में लगातार या असामान्य दर्द किडनी की बीमारी, संक्रमण या पथरी की ओर इशारा कर सकता है। जानिए ऐसे 5 महत्वपूर्ण संकेत, जिन्हें समय रहते पहचानना आपकी किडनी को गंभीर नुकसान से बचा सकता है।
Kidney Damage Symptoms: ये हैं किडनी की परेशानी के 5 बड़े संकेत
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, किडनी से जुड़ी बीमारियों की जल्द पहचान होने पर क्रॉनिक किडनी डिजीज की गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। अध्ययन बताता है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के शरीर के कुछ हिस्सों में लगातार दर्द होना भी शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकता है।
1. कमर के निचले हिस्से (Flank Area) में दर्द
यह किडनी की दिक्कत का सबसे आम संकेत माना जाता है, जिसमें दर्द अक्सर रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों और कमर के बीच महसूस होता है। कई बार यह दर्द एक या दोनों तरफ हल्के भारीपन जैसा शुरू होता है, लेकिन किडनी में पथरी होने पर यही दर्द अचानक तेज होकर लहरों की तरह उठ सकता है।
मांसपेशियों के दर्द की तरह इसमें आराम करने या करवट बदलने से भी राहत नहीं मिलती। अगर कमर के इस हिस्से में दर्द लगातार बना रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह किडनी में सूजन, संक्रमण या पथरी का संकेत हो सकता है।
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2. पेट के निचले हिस्से में दर्द
कई बार लोग पेट दर्द को सिर्फ गैस, अपच या पाचन की दिक्कत समझ लेते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह किडनी से जुड़ी परेशानी का भी संकेत हो सकता है। अगर पेट के निचले हिस्से में ऐंठन हो, भारीपन या दबाव महसूस हो, या अचानक तेज दर्द के साथ मतली आने लगे, तो यह किडनी स्टोन, किडनी संक्रमण, पेशाब रुकने या मूत्र मार्ग में रुकावट जैसी समस्या की तरफ इशारा कर सकता है। ऐसे दर्द को हल्के में न लें, खासकर जब यह बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे।
3. ग्रोइन (जांघ और जननांग के बीच का हिस्सा) या पेल्विक क्षेत्र में दर्द
किडनी से निकलने वाली मूत्र नलियां नीचे की तरफ मूत्राशय तक जाती हैं, और अगर इनमें पथरी फंस जाए या संक्रमण हो जाए तो दर्द जांघ और जननांग के बीच वाले हिस्से यानी ग्रोइन तक पहुंच सकता है। ऐसे में अचानक तेज और चुभने वाला दर्द, पेशाब करते समय जलन या असहजता, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, जी मिचलाना, बुखार या पेशाब के रंग में बदलाव जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं, जिन्हें हल्के में लेना ठीक नहीं है।
4. पैरों, टखनों और पंजों में दर्द या सूजन
जब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और गंदे पदार्थ ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में तरल जमा होने लगता है और इसका असर सबसे पहले पैरों, टखनों और कभी-कभी जांघों या पिंडलियों में दिख सकता है, जहां सूजन के साथ दर्द, जलन, झुनझुनी या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है; वैसे तो ऐसे लक्षण कई दूसरी दिक्कतों में भी नजर आ सकते हैं, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो इन्हें हल्के में न लेकर डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
5. सीने या पसलियों के आसपास दर्द
किडनी की गंभीर समस्या में कभी-कभी शरीर में पानी जमा होने, खनिजों का संतुलन बिगड़ने या दिल के आसपास सूजन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं, जिनका असर सीने तक महसूस होता है। ऐसे में व्यक्ति को सीने में दबाव, जकड़न, पसलियों के नीचे दर्द या फिर सांस लेने और लेटने पर बढ़ती बेचैनी जैसी परेशानी हो सकती है।
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अगर ऐसा दर्द बार-बार हो या इसके साथ सूजन, पेशाब में बदलाव या कमजोरी भी दिखे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर कमर में तेज दर्द के साथ पेशाब में खून आए, पेशाब करने में दिक्कत हो, तेज बुखार या ठंड लगने लगे, पैरों में लगातार सूजन रहे या सीने में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
किडनी की बीमारी कई बार शुरू में साफ नजर नहीं आती, लेकिन कमर, पेट, जांघ और जननांग के बीच के हिस्से, पैरों या सीने में लगातार और अजीब तरह का दर्द इसका इशारा हो सकता है, खासकर जब इसके साथ पेशाब में बदलाव, बुखार या सूजन भी दिखे। समय रहते जांच और इलाज कराने से किडनी को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
