जिसे कभी ‘जहरीला’ और सूअरों का समझा जाता था खाना, आज दुनिया की थाली पर करता है राज; जानिए आलू की दिलचस्प कहानी

Potato History in Hindi
1 min read

Potato History: आज समोसे, पराठे, चाट और दम आलू से लेकर फ्रेंच फ्राइज और चिप्स तक, आलू हर जगह दिखाई देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह साधारण सा दिखने वाला कंद कभी यूरोप में बदनाम था? दक्षिण अमेरिका से शुरू हुई आलू की कहानी अंधविश्वास, युद्ध, अकाल और एक दिलचस्प शाही चाल से गुजरते हुए दुनिया की सबसे अहम खाद्य फसलों तक पहुंची।

दक्षिण अमेरिका से यूरोप तक कैसे पहुंचा आलू?

आलू का मूल स्थान दक्षिण अमेरिका का एंडीज पर्वतीय क्षेत्र माना जाता है, जो आज के पेरू और बोलीविया के आसपास है। यहां इंका और उनसे पहले की स्थानीय सभ्यताएं हजारों साल से आलू की अलग-अलग किस्मों की खेती करती थीं। ऊंचे और ठंडे इलाकों में, जहां गेहूं और मक्का उगाना मुश्किल था, वहां आलू लोगों के लिए भोजन का बड़ा सहारा था।

स्थानीय लोग आलू को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे सुखाकर ‘चून्यो’ बनाते थे। इससे कठिन मौसम में भी भोजन बचाकर रखा जा सकता था। 16वीं शताब्दी में स्पेनिश खोजकर्ता दक्षिण अमेरिका पहुंचे। फ्रांसिस्को पिजारो के नेतृत्व में स्पेनियों का मुख्य उद्देश्य इंका साम्राज्य से सोना और चांदी हासिल करना था।

इसी दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों को एक कंद खाते देखा, जिसे वे ‘पापा’ कहते थे। करीब 1570 के आसपास आलू यूरोप पहुंचा। शुरुआत में इसे कोई खास सम्मान नहीं मिला। यूरोप के लोगों के लिए यह एक अनजान कंद था और इसके पौधे को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं भी फैल गईं।

‘गरीबों और सूअरों का खाना’ क्यों बना आलू?

यूरोप में लंबे समय तक आलू को इंसानों के लिए अच्छा भोजन नहीं माना गया। कई जगह इसे सूअरों और मवेशियों को खिलाया जाता था। कुछ स्थानों पर इसे कैदियों के भोजन के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। लोगों में यह डर भी था कि आलू जहरीला हो सकता है। लेकिन 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूरोप में लगातार युद्ध, अकाल और सूखे की स्थिति ने आलू की अहमियत बढ़ा दी।

युद्ध के दौरान गेहूं और जौ जैसी फसलें सैनिकों के निशाने पर आ जाती थीं। खेतों को नुकसान पहुंचता था और अनाज की कमी हो जाती थी। इसके मुकाबले आलू जमीन के नीचे उगता था। ऊपर से सेना गुजर जाने के बाद भी जमीन के अंदर मौजूद कंद बच सकता था। जरूरत पड़ने पर किसान जमीन खोदकर उसे निकाल सकते थे।

इसके अलावा, आलू को गेहूं की तुलना में कम उपजाऊ जमीन में भी उगाया जा सकता था और इससे अच्छी मात्रा में कैलोरी मिलती थी। धीरे-धीरे यही वजह बनी कि गरीब किसान और मजदूर आलू को अपने भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने लगे।

पारमेंटियर की चाल से बदली आलू की किस्मत

फ्रांस में आलू की छवि बदलने में एंटोनी-ऑगस्टिन पारमेंटियर की बड़ी भूमिका रही। सात वर्षीय युद्ध के दौरान वह प्रशिया में युद्धबंदी बने थे। वहां उन्हें भोजन के रूप में आलू दिया गया। उन्होंने देखा कि आलू खाने के बावजूद वह स्वस्थ और ऊर्जावान रहे।

फ्रांस लौटने के बाद पारमेंटियर ने लोगों को आलू अपनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की, लेकिन लोग इसे खाने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया। पेरिस के पास उन्होंने आलू का खेत तैयार कराया और दिन के समय वहां सैनिकों का पहरा लगवा दिया। इससे लोगों को लगा कि खेत में कोई बेहद कीमती चीज उगाई जा रही है।

रात में सैनिकों का पहरा हटा दिया जाता था। इसके बाद स्थानीय लोग उत्सुकता में खेत में पहुंचने लगे और वहां से आलू निकालकर अपने घर ले जाने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने आलू को खाना और उसकी खेती करना शुरू कर दिया। राजा लुई 16वें और रानी मैरी एंटोनेट द्वारा आलू के फूलों का इस्तेमाल करने से भी इसकी छवि बदलने में मदद मिली।

पुर्तगालियों के जरिए भारत पहुंचा आलू

भारत में आलू पुर्तगाली व्यापारियों के जरिए 17वीं शताब्दी की शुरुआत में पहुंचा। पश्चिमी तट के गोवा और सूरत जैसे क्षेत्रों में इसकी खेती की शुरुआत हुई। यहां इसे ‘बटाटा’ नाम से भी जाना गया। बाद में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर में भारत के मैदानी इलाकों में आलू की खेती को बढ़ावा मिला।

समय के साथ आलू भारतीय खाने का अहम हिस्सा बन गया। आज इसका इस्तेमाल समोसे, पराठे, चाट, सब्जियों और कई दूसरे व्यंजनों में किया जाता है। दुनिया की बात करें तो चावल, गेहूं और मक्का के बाद आलू चौथी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में शामिल है।

जिस कंद को कभी यूरोप में शक की नजर से देखा जाता था और जिसे गरीबों का भोजन माना जाता था, वही आज दुनिया के करोड़ों लोगों की थाली का अहम हिस्सा बन चुका है।

Jai Jagdamba News Whatsapp

ये भी पढ़ें:

घर की खिड़कियां हमेशा बंद रहती हैं तो हो जाएं सावधान! बढ़ सकती है परेशानी, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

2 करोड़ की फिल्म ने पार किया 424 करोड़ का आंकड़ा, अब तेलुगु में होगी रिलीज, कैंची धाम में भी बढ़ी भीड़

हरमनप्रीत कौर के बाद कौन संभालेगा भारतीय महिला टीम की कमान? इन 5 खिलाड़ियों पर टिकी नजर

About the Author

Netsha

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
View all articles by Netsha →