बिहार: 12 अक्टूबर को बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएगी राहत राशि! जानें किन परिवारों को मिलेगा पैसा

बिहार में इस साल दो चरणों में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पटना के संकल्प सभागार में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नुकसान का आकलन जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे।
सरकार ने तय किया है कि दूसरी चरण की बाढ़ से प्रभावित परिवारों को 12 अक्टूबर 2026 को अनुग्रह सहायता भेजने की प्रक्रिया की जाएगी। इससे पहले पहली बाढ़ से प्रभावित परिवारों को सितंबर में राशि दी जा चुकी है।
12 अक्टूबर को किन परिवारों को मिलेगी सहायता?
सरकार की ओर से दी जा रही यह सहायता (Bihar Flood Relief) हर बाढ़ प्रभावित परिवार के लिए एक साथ नहीं है। बैठक में दूसरी चरण की बाढ़ से प्रभावित परिवारों को अनुग्रह राशि देने की बात कही गई है। पहली चरण की बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को सितंबर में सहायता मिल चुकी है।
अब दूसरी चरण की बाढ़ से प्रभावित परिवारों की पहचान और उनकी सूची तैयार की जाएगी। किस जिले और किस गांव के परिवारों को इस चरण में शामिल किया जाएगा, इसका निर्धारण जिला स्तर पर तैयार की जाने वाली सूची के आधार पर होगा। इसलिए किसी परिवार के खाते में राशि तभी पहुंचेगी, जब उसका नाम संबंधित भुगतान सूची में शामिल होगा।
दूसरी किस्त में कितनी राशि मिलेगी?
पहले चरण में सरकार ने प्रति परिवार 7 हजार रुपये की सहायता के आधार पर भुगतान किया था। 15 सितंबर को राज्य के 8 लाख 27 हजार 472 प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से कुल 579.23 करोड़ रुपये भेजे गए थे।
हालांकि, दूसरी किस्त में कितनी राशि मिलेगी और इसके लिए अंतिम पात्रता क्या होगी, इसकी स्थिति विभाग की ओर से जारी आदेश और सूची से स्पष्ट होगी। ऐसे में पहली किस्त में मिली 7 हजार रुपये की सहायता को दूसरी किस्त की निश्चित राशि मानना सही नहीं होगा।
बिहार में दो बार क्यों आई बाढ़?
जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बैठक में इस साल आई बाढ़ के दोनों चरणों की जानकारी दी। पहली चरण की बाढ़ के दौरान गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। कई स्थानों पर पानी का स्तर पुराने रिकॉर्ड से भी ऊपर पहुंच गया। इसके बाद दूसरी चरण की बाढ़ में भारी बारिश का असर देखने को मिला।
गंडक नदी में चार स्थानों पर रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण में छह जगहों पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। पानी कम होने के बाद अब सरकार के सामने राहत के साथ-साथ क्षतिग्रस्त ढांचे को ठीक करने की चुनौती भी है। तटबंधों की मरम्मत, सड़कों की स्थिति और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
गाद और बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई परेशानी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में कहा कि इस साल गंगा, गंडक और सोन नदियों में पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा पानी आया। इसके साथ ही नदियों में जमा गाद को भी बाढ़ की गंभीर स्थिति की एक बड़ी वजह बताया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नदियों और तटबंधों पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया। सरकार की ओर से बताया गया कि,
बिहार देश का पहला राज्य है जिसने गाद नीति बनाई है। अब बाढ़ के बाद नुकसान और तटबंधों की स्थिति की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार ने संबंधित विभागों को नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार करने के साथ क्षतिग्रस्त सड़क, तटबंध और सरकारी संपत्ति की मरम्मत पर आने वाले खर्च की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी काम जल्द पूरा करने और पुनर्वास से जुड़े कार्यों पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल पहली बाढ़ से प्रभावित परिवारों को 579.23 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। दूसरी चरण की बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
जिन लोगों को सहायता मिलने की उम्मीद है, उन्हें अपने नाम की जानकारी जिला स्तर की सूची या डीबीटी से जुड़े संदेश के माध्यम से जांचनी चाहिए। दूसरी ओर, तटबंध और दूसरी सरकारी संपत्तियों की मरम्मत की प्रक्रिया नुकसान के आकलन और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी।

