Silver Price Crash: रिकॉर्ड ऊंचाई से 52% टूटी चांदी, क्या अब ₹1.29 लाख तक गिरेगा भाव?

अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय सर्राफा बाजार तक, चांदी की कीमतों में मची भारी हलचल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी 2026 में अपने ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड को छूने के बाद, चांदी के भाव में अब तक 52 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट आ चुकी है। बाजार विशेषज्ञों के ताजा तकनीकी चार्ट विश्लेषण के अनुसार, यदि यह गिरावट जारी रही, तो भारतीय बाजार में प्रति किलो चांदी की कीमत में बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
रिकॉर्ड हाई से कितनी गिरी चांदी?
आज 23 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) और भारतीय बाजार के समीकरणों को समझें तो गिरावट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजार का भाव
| समय/स्तर | अंतरराष्ट्रीय भाव (प्रति औंस) | भारतीय बाजार भाव (प्रति किलो) |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 (रिकॉर्ड ऊंचाई) | लगभग $121–$122 | लगभग ₹4.20 लाख |
| मौजूदा भाव (23 अक्टूबर 2026) | लगभग $54 | लगभग ₹1.99 लाख |
| संभावित अगला स्तर (विशेषज्ञों का अनुमान) | लगभग $35 | लगभग ₹1.29 लाख |
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $54 से फिसलकर $35 प्रति औंस पर आती है, तो मौजूदा स्तर से भी इसमें 35.2% की और बड़ी कमजोरी आ सकती है। इस स्थिति में भारत में चांदी ₹1.29 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच सकती है।
चांदी की इस महा-गिरावट के 4 मुख्य कारण
चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट (Silver Price Crash October 2026) के पीछे वैश्विक बाजार के चार बड़े कारण बताए जा रहे हैं। महंगे कच्चे तेल से बढ़ती महंगाई, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, निवेशकों की मुनाफावसूली और सोलर इंडस्ट्री की मांग को लेकर चिंता ने चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
1. महंगे कच्चे तेल से ब्याज दरों की चिंता
ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। कच्चा तेल महंगा होने से ऊर्जा और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है।
ऊंची ब्याज दरों की आशंका से निवेशकों का रुझान बदल सकता है, जिससे चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
2. मजबूत डॉलर से घट सकती है मांग
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं में चांदी खरीदना महंगा पड़ जाता है। इससे भारत समेत अन्य देशों के खरीदारों की लागत बढ़ सकती है और मांग प्रभावित हो सकती है। हालिया बाजार विश्लेषणों में डॉलर की मजबूती को चांदी की गिरावट की एक प्रमुख वजह माना गया है।
3. रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली
जनवरी 2026 में चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 122 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। भारत में भी इसका भाव करीब 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक गया था। रिकॉर्ड तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए चांदी बेचना शुरू किया।
इस बिकवाली से कीमतों पर दबाव बढ़ा। चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक होने के कारण मुनाफावसूली का असर भी तेजी से दिखाई दे सकता है।
4. सोलर इंडस्ट्री की मांग पर चिंता
चांदी का इस्तेमाल निवेश के अलावा सोलर पैनल समेत कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। चीन की एक बड़ी सोलर कंपनी की ओर से मैन्युफैक्चरिंग लागत घटाने का फैसला किए जाने के बाद औद्योगिक मांग को लेकर चिंता बढ़ी है।
यदि कंपनियां उत्पादन लागत कम करने के लिए चांदी की खपत घटाती हैं या आर्थिक गतिविधियां कमजोर पड़ती हैं, तो इसकी मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, किसी एक कंपनी के फैसले से पूरी इंडस्ट्री में चांदी की मांग कितनी घटेगी, यह तय नहीं माना जा सकता।
क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
चांदी के बाजार का इतिहास हमेशा से बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा है। पहले भी ऐसे बड़े क्रैश देखे जा चुके हैं:
1980 का क्रैश: जनवरी 1980 में चांदी करीब 48 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। लेकिन इसके बाद लगभग ढाई साल में कीमत करीब 90 फीसदी टूटकर जून 1982 में 4.80 डॉलर प्रति औंस रह गई।
2011 की गिरावट: अप्रैल 2011 में कीमत करीब 49 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। हालांकि, यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रही। जून 2013 तक भाव लगभग 18 डॉलर और नवंबर 2015 तक करीब 13 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
ध्यान दें: ₹1.29 लाख का यह अनुमान मौजूदा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुपात पर आधारित है। वास्तविक भाव में स्थानीय टैक्स, जीएसटी (GST) और डॉलर-रुपये की विनिमय दर के आधार पर बदलाव संभव है। कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।

