ब्राजील में लूला की जीत से भारत को क्या मिलेगा? तेल, रेयर अर्थ और 30 अरब डॉलर के कारोबार पर नजर

Lula Victory India Benefit: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत से भारत और ब्राजील के रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर लूला ने चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ किया है।
ऐसे में अब सवाल है कि उनकी वापसी से भारत को तेल, दुर्लभ खनिज और व्यापार के क्षेत्र में कितना फायदा मिल सकता है।
लूला की वापसी से भारत को उम्मीद
ब्राजील में 25 अक्टूबर 2026 को हुए दूसरे चरण के राष्ट्रपति चुनाव में लूला ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया। आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, लूला को करीब 51.79 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को लगभग 48.2 प्रतिशत वोट मिले। इसके साथ ही लूला ने चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर को लूला को जीत की बधाई दी। उन्होंने भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जताई। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
Heartiest congratulations to my dear friend, President Lula, on his remarkable re-election victory.
I look forward to working closely with him to further deepen and expand the multifaceted India-Brazil Strategic Partnership.
Together, we will continue to strengthen our cooperation across diverse sectors, advance the shared priorities of the Global South and work towards a more inclusive, equitable and sustainable world.
@LulaOficial
— Narendra Modi (@narendramodi) October 26, 2026
भारत के लिए ब्राजील इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लैटिन अमेरिका में उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देश ब्रिक्स समूह के सदस्य हैं और विकासशील देशों की वैश्विक मंचों पर भागीदारी बढ़ाने की बात करते रहे हैं। ऐसे में लूला की वापसी से दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
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भारत-ब्राजील व्यापार का बड़ा लक्ष्य
भारत और ब्राजील के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 12.20 अरब डॉलर था। वर्ष 2025 में यह बढ़कर 15.21 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि थी।
फरवरी 2026 में लूला की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इस यात्रा में दुर्लभ खनिजों, महत्वपूर्ण खनिजों, छोटे और मध्यम उद्योगों, डिजिटल सहयोग तथा अन्य क्षेत्रों से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनी।
भारत ब्राजील को पेट्रोलियम उत्पाद, डीजल, दवाएं, रसायन, कीटनाशक, इंजीनियरिंग उत्पाद और एल्युमिनियम जैसी चीजें निर्यात करता है। दूसरी ओर, ब्राजील से भारत कच्चा तेल, सोयाबीन तेल, कच्ची चीनी, कपास और लौह अयस्क जैसे उत्पाद खरीदता है।
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने से भारतीय दवा कंपनियों, रसायन उद्योग और इंजीनियरिंग क्षेत्र को नए बाजार मिल सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा मांग, कीमतों और व्यापारिक समझौतों पर निर्भर करेगा।
तेल और ऊर्जा में ब्राजील की भूमिका
भारत के लिए ब्राजील की अहमियत सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। ऊर्जा की जरूरतों और तेल की आपूर्ति के मामले में भी यह देश महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों से तेल खरीदता है। ऐसे में अलग-अलग देशों से आपूर्ति के विकल्प बढ़ाने से किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
दोनों देशों के बीच जैव ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में साझेदारी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ तकनीक से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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रेयर अर्थ से चीन पर निर्भरता घटाने का मौका
रेयर अर्थ एलिमेंट्स यानी दुर्लभ मृदा तत्वों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कई आधुनिक तकनीकों में किया जाता है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, ब्राजील के पास करीब 2.1 करोड़ टन रेयर अर्थ का भंडार है। यह दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात भंडारों में शामिल है।
भारत इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दे रहा है। इन क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की भरोसेमंद आपूर्ति महत्वपूर्ण है। ब्राजील के साथ सहयोग भारत को चीन के अलावा दूसरे आपूर्ति स्रोत विकसित करने का अवसर दे सकता है।
हालांकि, बड़े खनिज भंडार का मतलब यह नहीं है कि वहां से तुरंत पर्याप्त मात्रा में खनिज मिलना शुरू हो जाएगा। खनन, प्रसंस्करण, निवेश और परिवहन की क्षमता भी जरूरी है। इसलिए भारत को संभावित समझौतों के साथ उनकी वास्तविक प्रगति पर भी नजर रखनी होगी।
लूला की जीत भारत-ब्राजील संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर है। 2030 तक 30 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य, तेल की आपूर्ति और रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों की साझेदारी के अहम हिस्से रहेंगे। लेकिन भारत को वास्तविक फायदा तभी मिलेगा, जब राजनीतिक घोषणाएं ठोस समझौतों, निवेश और कारोबार में बदलेंगी।

