बाजार में पहुंच गए ₹20 के 3.5 करोड़ नकली सिक्के! कहीं आपकी जेब में भी तो नहीं, ऐसे करें असली और नकली की पहचान

आप भी बाजार में खरीदारी करते समय ₹10 और ₹20 के सिक्के लेते होंगे। लेकिन अब ₹20 का सिक्का लेते समय थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने दावा किया है कि वे अब तक ₹70 करोड़ से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में चला चुके हैं।
इस रकम को ₹20 के सिक्कों में बदलें तो यह संख्या करीब 3.5 करोड़ होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आपके पास मौजूद ₹20 का सिक्का असली है या नकली? आइए जानते हैं इस पूरे मामले और सिक्के की पहचान करने के तरीकों के बारे में।
कैसे पकड़ा गया नकली सिक्के बनाने वाला गिरोह?
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने 13 सितंबर 2026 को नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में पहुंचाने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह हरियाणा के सोनीपत में एक फैक्ट्री चला रहा था। खास बात यह थी कि फैक्ट्री में पेचकस बनाने के काम की आड़ में नकली ₹20 के सिक्के तैयार किए जा रहे थे।
पुलिस की जांच में सामने आया कि यह यूनिट करीब 10 महीने से काम कर रही थी। गिरोह के सदस्य पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए मशीनों को दूसरी जगह ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान सहारनपुर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ₹20 के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए, जिनकी कुल कीमत ₹1.28 लाख थी। इसके अलावा करीब ₹5 लाख मूल्य के अधबने सिक्के और सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें भी मिलीं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने दावा किया कि वे अब तक ₹70 करोड़ से अधिक के नकली सिक्के बाजार में पहुंचा चुके हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
20 के नकली सिक्के कैसे बनाए जाते थे?
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली सिक्के बनाने के लिए दिल्ली से धातु के छल्ले और खास तरह की डाई (Die) मंगाई जाती थी। इन छल्लों को मशीनों में दबाकर ₹20 के सिक्के जैसा आकार दिया जाता था। इसके बाद उनकी घिसाई और पॉलिश की जाती थी, ताकि वे देखने में असली सिक्कों जैसे लगें।
पुलिस के मुताबिक, इन सिक्कों को बनाने में करीब ₹5 से ₹6 का खर्च आता था। गिरोह के पास रोजाना 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता होने का दावा किया गया है।
तैयार सिक्कों को बिचौलियों के जरिए बाजार में पहुंचाया जाता था। आरोपियों के अनुसार, 100 सिक्कों के पैकेट में ₹200 की कीमत वाले नकली सिक्के करीब ₹160 में दिए जाते थे। इसके बाद इन्हें टोल प्लाजा, शराब की दुकानों और छोटी दुकानों के माध्यम से बाजार में चलाया जाता था। पुलिस को इस नेटवर्क के उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, बिहार और झारखंड तक फैले होने की जानकारी मिली है।
असली ₹20 के सिक्के की पहचान कैसे करें?
इसके लिए (Fake 20 Rupee Coins Identification) सबसे पहले सिक्के की बनावट और उस पर बने निशानों को ध्यान से देखना चाहिए। भारत सरकार की ओर से जारी नए डिजाइन के ₹20 के सिक्के की सबसे बड़ी पहचान इसका 12 किनारों वाला आकार है। यह सामान्य गोल सिक्के जैसा नहीं होता। इसका बाहरी व्यास 27 मिलीमीटर और वजन लगभग 8.54 ग्राम निर्धारित है।
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इस सिक्के में दो अलग-अलग रंगों की धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। इसका बाहरी हिस्सा निकेल सिल्वर (Nickel Silver) और बीच का हिस्सा निकेल ब्रास (Nickel Brass) से बना होता है। एक तरफ अशोक स्तंभ का सिंह चिह्न, सत्यमेव जयते, भारत और INDIA लिखा होता है। दूसरी तरफ ₹ का निशान, 20 की संख्या, बीस रुपये और TWENTY RUPEES लिखा होता है। सिक्के पर अनाज की बालियों का डिजाइन भी बना होता है।
हालांकि, केवल रंग, चमक या वजन देखकर किसी सिक्के को नकली घोषित करना सही नहीं है। नकली सिक्के भी असली जैसे दिखने के लिए बनाए जा सकते हैं। इसलिए अगर आपको किसी सिक्के पर शक है तो उसकी तुलना किसी दूसरे भरोसेमंद ₹20 के सिक्के से करें। जरूरत पड़ने पर बैंक या संबंधित सरकारी अधिकारियों से इसकी जांच करवाएं।
ध्यान दें: ₹70 करोड़ के नकली सिक्के बरामद नहीं हुए हैं। यह आरोपियों का दावा है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। इसलिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सिक्के लेते समय उसकी बनावट और पहचान जरूर जांचें।

