बक्सर में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा! एक ही जमीन दो बार बिकी, रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के बाद भी नहीं हुवा कब्जा

Buxar Property Fraud Double Land Registration Case
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Buxar Property Fraud: बिहार के बक्सर से जमीन से जुड़े एक ऐसे गोरखधंधे का मामला सामने आया है, जिसने आम खरीदारों की नींद उड़ा दी है। यहां इंजीनियरिंग कॉलेज के पास स्थित कीमती जमीन को एक नहीं बल्कि दो बार बेच दिया गया, और हैरानी की बात यह है कि दोनों बार रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज तक करा दिया गया। हालाकी जब असली खेल सामने आया, तब तक खरीदारों के लाखों रुपये फंस चुके थे।

Buxar Property Fraud: सौदे से लेकर रजिस्ट्री तक सब कुछ वैध दिखा कर ठगी

बक्सर जिले के महदह मौजा में सामने आए जमीन के इस मामले में शुरुआत से लेकर रजिस्ट्री तक सब कुछ वैध दिखाया गया, जिससे खरीदारों को कोई शक नहीं हुआ। एक ही परिवार की तीन महिलाओं नीतू द्विवेदी, निशा कुमार और कविता उपाध्याय ने मिलकर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास स्थित साढ़े चार कट्ठा कीमती जमीन 63 लाख रुपये में खरीदी थी।

यह सौदा पारिवारिक निवेश के रूप में किया गया, क्योंकि तीनों के पति आपस में भाई हैं। प्राथमिकी के अनुसार, जमीन का सौदा महदह निवासी रत्नेश कुमार सुमन के जरिए समाहरणालय रोड निवासी योगेन्द्र सिंह से तय हुआ, जबकि जमीन कागजों में राम दयाल सिंह और योगेन्द्र सिंह के नाम दर्ज थी।

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सौदे के समय रत्नेश कुमार सुमन के साथ योगेन्द्र सिंह और अनिल कुमार सिंह भी मौजूद थे। आरोप है कि कुल रकम का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा ‘ग्रीन इंडिया’ नाम की कंपनी के खाते में जमा कराया गया, जबकि बाकी रकम नकद ली गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास सभी भुगतानों के प्रमाण मौजूद हैं।

भुगतान के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और दाखिल-खारिज भी उनके नाम से हो गया, जिससे उन्हें किसी भी तरह की गड़बड़ी का अंदेशा नहीं हुआ।

घेराबंदी के दौरान सामने आया दूसरा जमीन खरीदार

बता दें कि असली मामला उस समय उजागर हुआ जब खरीदार अपनी खरीदी हुई जमीन की घेराबंदी कराने पहुंचे। तभी मौके पर कुछ अन्य लोग आ धमके और उन्होंने दावा किया कि उसी जमीन का एक हिस्सा वे पहले ही खरीद चुके हैं। जांच में सामने आया कि दूसरा खरीदार अभय नारायण राय है, जिसने साढ़े चार कट्ठा में से ढाई कट्ठा जमीन पहले ही ले रखी थी और उसका दाखिल-खारिज भी हो चुका था।

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यानी एक ही जमीन का दो बार वैध रिकॉर्ड तैयार कर दिया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक आपसी समझौते की कोशिश चली, कभी दूसरी जमीन देने तो कभी इधर-उधर समायोजन की बात हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

हालाकी जब कोई रास्ता नहीं निकला तो तीनों महिला खरीदारों ने नौ अप्रैल दो हजार पच्चीस को आरोपियों को वकालत नोटिस भेजा, जिसका कोई जवाब नहीं मिला। अंततः काफी मशक्कत के बाद चार दिसंबर दो हजार पच्चीस को नगर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई।

तीन साल बाद भी जस का तस मामला, प्रशासन पर सवाल

हालाकी मामला दर्ज हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन खाता संख्या 812 और खेसरा संख्या 2485 से जुड़ा यह जमीन विवाद आज भी वहीं का वहीं अटका हुआ है। करीब 3 साल पहले रजिस्ट्री पूरी होने के बाद भी जमीन का कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है, जो अपने आप में चौंकाने वाला है।

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गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण (Buxar Property Fraud) ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक ही जमीन का दो बार दाखिल खारिज कैसे हो गया, इसकी स्पष्ट जवाबदेही अब तक तय नहीं हो सकी है। क्या राजस्व कार्यालय की भूमिका की गहन जांच होगी और जमीन के दलालों पर सख्त कार्रवाई कब होगी, यह सब फिलहाल अनसुलझा ही नजर आ रहा है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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