क्या फिर सत्ता में लौटेंगे नीतीश कुमार? जानिए किसे मिलीं कितनी सीटें और क्या 14 नवंबर को बदलेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण
Bihar Election 2025 Exit Poll: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान सफलतापूर्वक समाप्त हो चुका है और अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल (exit poll) पर हैं। हालाँकि अभी तक अंतिम फैसला 14 नवंबर को होने वाली वोटों की गिनती पर टिका है। वोटिंग प्रतिशत में भी इस बार नया रिकॉर्ड देखने को मिला, दूसरे चरण में 67.14 % तक मतदान दर्ज हुआ था।
Bihar Election 2025 Exit Poll में NDA को मिले बहुमत के संकेत
कई सर्वे एजेंसियों ने अब तक अपने पूर्वानुमान पेश कर दिए हैं। खास तौर पर ये अनुमान दिखा रहे हैं कि NDA को स्पष्ट बहुमत मिलने की उम्मीद है। नीचे प्रमुख सर्वेक्षणों के Bihar Election 2025 Exit Poll अनुमान दिए गए हैं:
| सर्वे एजेंसी | NDA सीटें | महागठबंधन सीटें | अन्य दल |
|---|---|---|---|
| Chanakya Strategies | 130-138 | 100-108 | 3-5 |
| People’s Insight | 133-148 | 87-102 | 3-6 |
| JVC Exit Poll | 135-150 | 88-103 | 3-6 |
| Polstrat | 133-148 | 87-102 | 3-5 |
| People’s Pulse | 133-159 | 75-101 | 2-8 |
| DV Research | 137-152 | 83-98 | 2-4 |
| Dainik Bhaskar | 145-160 | 73-91 | 5-10 |
| P-Marq | 142-162 | 80-98 | 0-3 |
इन आंकड़ों से यह साफ नजर आता है कि NDA को बहुमत की दिशा में काफी मजबूत संकेत मिल रहे हैं।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल (Bihar Election 2025 Exit Poll) में महागठबंधन (MGB) के लिए तस्वीर कुछ खास उजली नहीं दिख रही है। सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन को 70 से 100 सीटों के बीच सिमटने का अनुमान है, जो बहुमत से काफी दूर है। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी इस चुनाव में लगभग हाशिए पर नजर आ रही है, क्योंकि ज़्यादातर सर्वेक्षणों में इसे 0 से 5 सीटों तक सीमित बताया गया है।
हालांकि, अंतिम फैसला अब भी बाकी है। 14 नवंबर को वोटों की गिनती के साथ ही यह तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। गौरतलब है कि Exit Poll के अनुमान कई बार वास्तविक परिणामों से अलग भी साबित हुए हैं, इसलिए इस बार भी अंतिम नतीजों का इंतजार करना ही समझदारी होगी।
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जो जनता के लोकतंत्र के प्रति गहराते विश्वास को दर्शाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस चुनाव में विकास और प्रगतिशील एजेंडा, साथ ही गठबंधन की रणनीतियाँ और मतदाताओं की नई प्राथमिकताएँ निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
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खास बात यह है कि नए राजनीतिक दलों के लिए मैदान चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, जबकि पुराने गठबंधन अपनी मजबूती बनाए हुए हैं। हालाँकि, अब तक किसी बड़े राजनीतिक लहर या अप्रत्याशित बदलाव के स्पष्ट संकेत सामने नहीं आए हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प बन गया है।
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