BREAKING: NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा! चिट्ठी में लिखी चौंकाने वाली बातें

देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला छात्रों के भविष्य, देश की एकता और मौजूदा हालात को देखते हुए लिया गया है। आखिर उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया, सरकार ने NEET मामले में अब तक क्या कदम उठाए और पत्र में क्या संदेश दिया, जानिए पूरी कहानी।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों छोड़ा पद?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया है। उनका कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के छात्रों और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि,
जंतर मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने हालात का फायदा कोई राष्ट्र विरोधी ताकत न उठा सके, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और सभी विद्यार्थी अपनी पढ़ाई तथा करियर पर ध्यान दे सकें।
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला और पूरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन और विश्वास उनके साथ रहा।
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NEET पेपर लीक पर सरकार ने क्या कदम उठाए?
अपने इस्तीफे (Dharmendra Pradhan Resignation) में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि,
3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों की जानकारी सामने आते ही केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। उनके अनुसार सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से पूरा कराना था।
उन्होंने कहा कि,
इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
इस्तीफे की चिट्ठी में क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी पीछे नहीं हटे। उनका उद्देश्य था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य खराब न हो और किसी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए।
उन्होंने बताया कि,
16 जुलाई को घोषित री-एग्जाम के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने भी सफलता हासिल की। इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।
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धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में युवाओं को भारत का भविष्य और विकसित भारत का निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि,
भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं की ऊर्जा किसी भ्रम या विवाद में नहीं फंसनी चाहिए।
उन्होंने अंत में लिखा कि देश की एकता बनी रहे, छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे और वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। साथ ही उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों, सहयोगियों और सभी लोगों का धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में भी वह देश, ओडिशा और युवाओं की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।




