होर्मुज की खाड़ी से तनाव के बीच मुंबई पहुंचा कच्चे तेल का टैंकर, ईरान की मंजूरी के बाद पूरी हुई अहम यात्रा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक अहम खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरकर कच्चे तेल से भरा एक बड़ा टैंकर आखिरकार मुंबई पोर्ट पहुंच गया है। हाल के दिनों में इसी रास्ते पर कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं। ऐसे में इस तेल टैंकर का सुरक्षित भारत पहुंचना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लाइबेरिया के झंडे वाला तेल टैंकर “शेनलॉन्ग सुएजमैक्स” बुधवार को मुंबई पोर्ट पहुंचा (First crude shipment reaches Mumbai)। इस जहाज में सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से लोड किया गया कच्चा तेल था। यह टैंकर 1 मार्च को रास तनुरा से रवाना हुआ था और इसके बाद इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ा।
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के अनुसार,
तेल टैंकर ने तनावपूर्ण हालात के बावजूद सुरक्षित यात्रा पूरी की और बुधवार को मुंबई पहुंच गया। यह वही समुद्री रास्ता है जहां हाल के दिनों में कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं।
भारत-ईरान कूटनीतिक बातचीत के बाद मिली अनुमति
सूत्रों के अनुसार, इस तेल टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति ईरान ने कूटनीतिक बातचीत के बाद दी। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद यह रास्ता साफ हुआ।
हालांकि क्षेत्र में हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से तेहरान ने इस जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण काफी कड़ा कर दिया है। इसके बाद कई जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
View this post on Instagram
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यहां से हर दिन दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है।
अगर इस मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। इसी वजह से भारत सहित कई देश इस क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर करीब से नजर रख रहे हैं।
भारत सरकार ने भी इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार,
फिलहाल फारस की खाड़ी में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक तैनात हैं।
गौरतलब है कि सरकार ने 28 फरवरी से ही शिपिंग मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में 24 घंटे का कंट्रोल रूम बना दिया है, ताकि वहां मौजूद जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर नजर रखी जा सके।
हालांकि तनाव कम होने के संकेत अभी नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में कांडला बंदरगाह की ओर जा रहे एक थाई जहाज पर भी इसी इलाके में हमला हुआ, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
होर्मुज संकट के बीच दुनिया के तेल बाजार पर बढ़ता दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत से अब तक ईरान इस क्षेत्र में कम से कम 16 जहाजों पर हमला कर चुका है। इनमें दुबई के पास एक कंटेनर जहाज पर हमला, बहरीन के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास आग की घटना, सऊदी अरब के एक बड़े तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला और इराक के बसरा बंदरगाह पर हमले के कारण तेल संचालन बाधित होना शामिल है।
इसी बीच तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल मुंबई पहुंचे इस तेल टैंकर ने भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार के लिए बेहद अहम बनी रहने वाली है।
