LIC में सरकार बेच रही 6.5% हिस्सेदारी, 31 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

Government LIC Stake Sale: LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, 31 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी
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Government LIC Stake Sale: अगर आप शेयर बाजार या LIC पर नजर रखते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने LIC में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है, जिससे करीब 31,400 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। यह सिर्फ एक हिस्सेदारी बिक्री नहीं, बल्कि सरकार के विनिवेश लक्ष्य और LIC के भविष्य दोनों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

LIC के कितने शेयर बेच रही है सरकार?

भारत सरकार ने घोषणा की है कि वह भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से होगी। यह प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी और बुधवार को समाप्त होगी।

इस ऑफर में शुरुआत में सरकार 2.5% हिस्सेदारी बेच रही है। इसके तहत करीब 31.6 करोड़ शेयर बाजार में पेश किए जाएंगे। यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है तो सरकार ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी, यानी लगभग 50.6 करोड़ और शेयर भी बेच सकती है। इस तरह कुल हिस्सेदारी 6.5% तक पहुंच जाएगी।

निवेशकों के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?

सरकार ने OFS के लिए प्रति शेयर 382 रुपये का आधार मूल्य तय किया है, जो सोमवार के बंद भाव 424 रुपये से लगभग 10% कम है। ऐसे में कई निवेशकों की नजर इस ऑफर पर रहेगी। पहले दिन केवल संस्थागत निवेशक बोली लगा सकेंगे, जबकि खुदरा निवेशकों को दूसरे दिन आवेदन करने का मौका मिलेगा।

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सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ेगी, सेबी के नियम पूरे होंगे

इस हिस्सेदारी बिक्री का एक बड़ा उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियम का पालन करना भी है। फिलहाल LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी लगभग 3.5% है। यदि यह OFS पूरी तरह सफल रहता है तो सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर करीब 10% हो जाएगी।

इससे LIC तय समय से पहले SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम को पूरा कर लेगी। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने भी कहा कि,

यह कदम LIC को सार्वजनिक हिस्सेदारी के लक्ष्य तक समय से पहले पहुंचाने में मदद करेगा।

OFS की प्रक्रिया में पहले दिन केवल गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशक बोली लगा सकेंगे, जबकि खुदरा (Retail) निवेशकों को दूसरे और अंतिम दिन आवेदन करने का अवसर मिलेगा।

सरकार के विनिवेश लक्ष्य को कैसे मिलेगा फायदा?

यदि ये हिस्सेदारी बिक्री पूरी तरह सफल रहती है तो सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को बड़ा सहारा मिलेगा। फिलहाल सरकार विनिवेश से लगभग 21,000 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। इस बिक्री के बाद यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 52,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा सरकार परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetisation) से भी 6,367 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। दोनों को मिलाकर सरकार करीब 60,000 करोड़ रुपये के आसपास राशि जुटा लेगी। वित्त वर्ष के लिए सरकार का कुल विनिवेश लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये है।

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सरकार को उम्मीद है कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह लक्ष्य पूरा होने की संभावना और मजबूत होगी। इससे सरकार को ईंधन और उर्वरक सब्सिडी जैसी अतिरिक्त जरूरतों के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। साथ ही राजकोषीय घाटे को बजट में तय 4.3% जीडीपी के लक्ष्य के करीब बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।

कुछ समय पहले LIC ने अपने शेयरधारकों को 1:1 बोनस शेयर भी दिए थे। अब हिस्सेदारी बिक्री के इस फैसले को सरकार के बड़े विनिवेश अभियान का अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

आगे क्या होगा?

अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि OFS को निवेशकों से कितना अच्छा प्रतिसाद मिलता है। यदि पूरी हिस्सेदारी बिक जाती है तो LIC SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम को समय से पहले पूरा कर लेगी। साथ ही सरकार को अपने विनिवेश लक्ष्य के करीब पहुंचने और अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

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